बदरीनाथ, केदारनाथ वन प्रभाग और नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत इस साल हरेला पर्व के अलावा पूरे सीजन में 27 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ आशुतोष सिंह का कहना है कि हरेला पर्व पर 215 वन पंचायतों में 4770 लगाए जाएंगे। इसके अलावा निजी स्तर पर पौधरोपण के लिए भी पौधे वितरित किए जाते हैं। वहीं हरेला के अतिरिक्त पूरे सीजन में 2178.95 हेक्टेयर क्षेत्र में 21 लाख 93 हजार 926 पौधे लगाने का लक्ष्य है। प्रभाग में बीते साल 2713.26 हेक्टयेर क्षेत्र में 22 लाख 17 हजार 61 पौधे लगाए गए। नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ धीरेंद्र चंद्र बिष्ट ने बताया कि एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। 60 हजार रिंगाल के पौधे जोशीमठ और थैंग वन पंचायत में लगेंगे। शेष अन्य जगह पर देवदार आदि के पौधे लगाए जाएंगे।
हरेला पर पौधे रोपकर करेंगे देखभाल
कर्णप्रयाग। हरेला पर्व पर वन विभाग व सामाजिक संस्थाओं की ओर से कर्णप्रयाग, कालेश्वर, थराली, नारायणबगड़, देवाल, नौटीआदि जगहों पर प्रतिवर्ष हजारों पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन खाद, पानी और देखरेख के बिना ये पौधे युवा होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। क्षेत्र के हरीश चौहान, दिनेश थपलियाल, शिव प्रसाद सती, अनूप चौहान का कहना है सरकारी विभागों को हरेला पर्व पर पौधे लगाने के बाद उनकी रक्षा भी करनी चाहिए।
पौधों की नहीं होती है देखभाल
नई टिहरी। हरेला पर्व पर हर साल जिलेभर में पौध रोपण किया जाता है। जिस उत्साह से पौध लगाई जाती है, उस जुनून के साथ उनकी देखभाल नहीं की जाती है, जिससे कई ऐसी जगह हैं। जहां हरेला पर्व पर हर साल पौध रोपण किया जाता है। वन विभाग का कहना है, कि हरेला पर्व पर वन विभाग के अलावा जो सरकारी विभाग, स्कूल-कालेज और संस्थाएं पौध रोपण करती है, उसका वन विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं है। डीएफओ डा. कोको रोसे का कहना है, कि रोपी गई पौध में कई ऐसी प्रजाति है, जिनकी ग्रोथ काफी धीमी होती है। इस साल जिलेभर में 22 लाख पौध रोपण का लक्ष्य रखा गया है।
साढ़े तीन लाख पौधे रोपने का लक्ष्य
रुद्रप्रयाग। वन प्रभाग द्वारा डीएफओ वैभव कुमार के नेतृत्व में 100 पौधे रोपे जाएंगे। डीएम ने बताया कि हरेला पर्व से लेकर आगामी 15 अगस्त तक जिले में साढ़े तीन लाख विभिन्न प्रजाति के पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इधर, डीएफओ वैभव कुमार ने बताया कि सभी छह रेंजों में विभिन्न प्रजाति के पौधों के रोपण के साथ ही उनके संरक्षण के लिए दो-दो अधिकारियों/कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
श्रीयंत्र टापू और सांपला में हो रहे हैं वन तैयार
श्रीनगर। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर के समीप अलकनंदा नदी किनारे दो साल पूर्व श्रीयंत्र टापू (माल ढैया) गंगा वाटिका ग्रीन पार्क में रूप में विकसित हो रही है। यहां दो साल पूर्व रोपे गए पौधे धीरे-धीरे पेड़ों का आकार ले रहे हैं। इसमेें तत्कालीन जिलाधिकारी सुशील कुमार की पहल पर पौधे रोपने के लिए प्रत्येक अधिकारी ने दो हजार रुपये दिए थे। श्रीनगर से करीब 12 किमी दूर देलचौैरी क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत कांडा के संापला गांव में जंगल तैयार हो रहा है। संस्था के संस्थापक प्रमोद बमराड़ा बताते हैं कि जंगल के अंदर ही पर्यटकों के घूमने के लायक बनाया जाएगा। भविष्य में यह जंगल ग्रामीणों की आमदनी से भी जुड़ जाएगा।
अखोड़ीसैण से चंद्रबदनी तक फैला हो बांज-बुरांश का जंगल
नई टिहरी। हरेला पर्व पर हर साल लाखों पौध रोपी जा रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की सहभागिता के बगैर इस उद्देश्य को हासिल करना आसान नहीं है। जाखणीधार ब्लाक में ही 25 से 30 साल पहले खाली पहाड़ियां आज अखोड़ीसैण से लेकर चंद्रबदनी मंदिर क्षेत्र तक हरियाली से भर गई हैं। अखोड़ीसैण के जसपाल सिंह पंवार, राजेश बिष्ट, पेटव के मुरलीधर पेटवाल, अनेठी के ज्ञान सिंह और खंडोगी के प्रकाश सिंह रावत बताते हैं, कि स्थानीय लोगों की 25-30 सालों की मेहनत से पूरा क्षेत्र हरियाली से पट गया है। वन दरोगा आनंद सिंह रावत ने बताया कि जंगल बचाने में स्थानीय लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।