पांच सूत्री मांगों को लेकर ग्राम प्रधान संगठन ने दशोली ब्लाक मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार के विरोध में धरना दिया। पंचायत प्रतिनिधियों ने एसडीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भी भेजा।
प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में दशोली ब्लाक के सभी ग्राम प्रधान चमोली बाजार से जुलूस निकालकर दशोली ब्लाक तक पहुंचे और प्रदर्शन किया। यहां आयोजित सभा में जिलाध्यक्ष रविंद्र नेगी ने कहा कि कई बार पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से 29 विकास विभागों को पंचायतों के अधीन हस्तांतरित करने और पंचायतों को अधिकार संपन्न कराने की मांग की गई, लेकिन इस ओर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
कहा गया कि पंचायतें सरकारी कार्यों की निगरानी और सत्यापन के लिए अधिकृत हैं, लेकिन पंचायतों की मांगों को अनसुना किया जा रहा है। प्रधानों ने एक स्वर में कहा यदि शीघ्र उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो जिले के सभी क्षेत्र पंचायत की बैठकों का बहिष्कार और जिला व ब्लाक मुख्यालय पर आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर सरतोली के प्रधान विजेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, नरेंद्र लाल, महावीर राणा, बलवीर कोहली, धीरज बिष्ट, सुनैना पुरोहित और विनीता देवी आदि मौजूद थे।
ब्लाक कार्यालय पर जड़ा ताला
नारायणबगड़। क्षेत्र पंचायत की बैठक में प्रधानों के कोरम को हटाने आदि से नाराज प्रधानों ने ब्लाक कार्यालय पर प्रदर्शन कर तालाबंदी की। बाद में बीडीओ टीआर शर्मा के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजा और जल्द कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
प्रधान संगठन के कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में प्रधान ब्लाक कार्यालय पहुंचे और मुुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। प्रदर्शन करते हुए प्रधानों ने कहा कि सरकार ने राज्य वित्त के मद में 20 फीसदी की कटौती कर दी है। मनरेगा के तहत विकास योजनाओं के हाल यह हैं कि दो सालों से सामग्री अंश और एक साल से कई श्रमिकों का भुगतान नहीं हो पाया। इसके बावजूद विकास विभाग फोकस एरिया और शौचालयों का निर्माण गांवों में करा रहा है।
यही नहीं बीडीसी के कोरम से प्रधानों को बाहर करने पर भी सवाल उठाए गए। करीब एक बजे तक तालाबंदी चली। प्रदर्शन करने वालों में महिपाल सिंह, उषा रावत, रामेश्वरी देवी, माहेश्वरी देवी, खिला देवी, गोदांबरी देवी, हरक सिंह, रणजीत सिंह, मनमीत सिंह, महेंद्र सती, हंसा देवी और सुनीता देवी आदि मौजूद थे।
- पंचायतों को मिलने वाली राज्य वित्त के बजट में 20 फीसदी कटौती वापस ली जाए।
- ग्राम प्रधानों को प्रतिमाह दस हजार रुपये मानदेय दें।
- मनरेगा योजना में मजदूर और सामग्री अंश का भुगतान शीघ्र किया जाए।
- मनरेगा के तहत प्रत्येक प्रधानों व वीडीओ को डिजीटल हस्ताक्षर उपलब्ध कराए जाएं।