चमोली के सिंचाई विभाग के लिए मासौं सिंचाई नहर कामधेनु बनी है।
यहां विभाग की ओर से ढाई दशक से कागजों में खेतों की सिंचाई की जा रही है।
नहर के मुख्य स्रोत पर पानी नहीं है, इसके बावजूद विभाग की ओर से मौजूदा समय में 42 लाख की लागत से नगर की मरम्मत करवाई जा रही है और लोगों के खेतों को पानी सप्लाई भी की जा रही है।
यह खुलासा सूचना अधिकार के तहत हुआ है।
दशोली ब्लॉक के अंतर्गत मासौं गांव के वन पंचायत सदस्य आनंद सिंह ने लोक सूचना अधिकारी अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग से मासौं सिंचाई नहर की सूचना मांगी थी।
इसमें ईई ने बताया कि मासौं सिंचाई नहर का निर्माण वर्ष 1979-80 में हुआ। वर्ष 1990 तक नहर पर पर्याप्त पानी आया और करीब 600 नाली भूमि की सिंचाई हुई।
वर्ष 1991 में नहर के मुख्य और मध्य भाग में भूस्खलन होने से नहर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई।
तब से नहर पर पानी सप्लाई नहीं हुआ है, जबकि पिछले दो दशकों में सिंचाई विभाग की ओर से एक करोड़ 77 लाख नहर की मरम्मत पर खर्च कर दिए गए हैं।
आनंद सिंह ने सूचना अधिकार के तहत सूचना मांगी कि विभाग की ओर से कितने परिवारों के खेतों को सिंचाई के लिए पानी सप्लाई किया जा रहा है।
इस पर अपीलीय अधिकारी की ओर से गांव के 150 में से 72 परिवारों के खेतों को पानी सप्लाई होने की बात कही है, जबकि हकीकत यह है कि बीते ढाई दशक से नहर पर पानी नहीं आ रहा है।
कोट
मासौं नहर के स्रोत पर जलस्तर बीते कुछ वर्षों से कम हो गया है, जिससे नहर पर पानी सप्लाई करना मुश्किल बना हुआ है।
गांव के 72 परिवारों के खेतों को नहर की मरम्मत कार्य शुरू होने से पूर्व तक पानी दिया गया। इन दिनों नहर का पुनर्गठन किया जा रहा है।
आगामी अप्रैल माह तक नहर में पानी सप्लाई कर दी जाएगी। - अतुल पांडे, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, चमोली।