ग्रामीणों के लंबे संघर्ष के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से उर्गम घाटी में एंबुलेंस सेवा तो शुरू कर दी, लेकिन बिना चालक के एंबुलेंस सड़क किनारे धूल फांक रही है। स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने सीमांत क्षेत्र विकास योजना (बीएडीपी) के तहत डेढ़ वर्ष पूर्व उर्गम घाटी के लिए एंबुलेंस सेवा तैनात की, लेकिन चालक न होने से एंबुलेंस सीएचसी केंद्र जोशीमठ में खड़ी रही। जब उर्गम घाटी के ग्रामीणों ने एंबुलेंस सेवा शुरू करने की मांग की और प्रदर्शन किया तो अक्तूबर माह में सीएचसी जोशीमठ से एंबुलेंस को जोशीमठ-उर्गम मोटर मार्ग के अंतिम स्टेशन ल्यारी में खड़ी कर चालक चला गया।
बलवीर सिंह, गजपाल पंवार, कुंवर चौहान, रघुवीर रावत और प्रताप सिंह का कहना है कि एंबुलेंस का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सीएमओ डा. विराज शाह का कहना है कि बीएडीपी के तहत एंबुलेंस तो मिली, लेकिन चालक की कमी के चलते एंबुलेंस संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग में चालकों की कमी है। स्वास्थ्य निदेशालय को भी इस संबंध में कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन चालक की तैनाती नहीं हो पा रही है।