बंड मेले के दूसरे दिन गढ़वाली गीतों की धूम रही। गायक जगदीश नैथवाल, गायिका मीना बिष्ट व दीया कंडारी के गीतों पर दर्शक झूम उठे। मेले का शुभारंभ बीकेटीसी अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल और जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष गजेंद्र रावत ने किया। उन्होंने कहा कि बंड पट्टी का ऐतिहासिक बंड मेला आज भी आध्यात्मिक, लोक कला और संस्कृति को जीवंत रखे है। इस एक साप्ताहिक मेले को ग्रामीण क्षेत्र के रक्षक बंड भूमियाल को समर्पित करते हैं।
मेले में गायक जगदीश नैथवाल ने बंड भूमियाल की स्तुति के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज किया। उन्होंने औणा छन रे बाराती आज..., नीती ना जा, माणा ना जा मेरा बीर सिंगा..., जमनु बदलेगी, फैशन बदलेगी..., स्याली रे बसंती... जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दी, जबकि गायिका मीना बिष्ट ने अपने चिर परिचित अंदाज में ऊंची-नीची डांड्यूं का बीचमां गीत से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायिका दीया कंडारी ने ह्यूंद का दिनां, फिर बौड़ी एगेनी... गीत पर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इस मौके पर व्यापार संघ के प्रदेश महामंत्री प्रकाश मिश्रा, बंड विकास संगठन के अध्यक्ष शंभू प्रसाद सती, दीपक पंत, सुनील कोठियाल, गुलाब सिंह, सौरभ भाटिया, प्रदीप नेगी, विजय मलासी, रमेश बंडवाल, अतुल शाह, राजेंद्र हटवाल, हरेंद्र पंवार, किशर पुंडीर, रमेश भंडारी, गजेंद्र राणा, हरीश पुरोहित और अयोध्या हटवाल आदि मौजूद थे।
कृषि तकनीकी की जानकारी दी
मेले में कृषि विभाग की ओर से आयोजित कृषि गोष्ठी में डा. जितेंद्र भास्कर और डा. देवेंद्र ने काश्तकारों को आधुनिक कृषि तकनीकी की जानकारी दी। जबकि उद्यान गोष्ठी में उद्यान अधिकारी देवेंद्र स्वरूप, विजय प्रसाद मलासी, जानकी प्रसाद मिश्रा और अरुण मैठाणी ने लोगों को उद्यानीकरण से आजीविका संवर्द्धन के लिए प्रेरित किया।
चिकित्सकों ने किया स्वास्थ्य परीक्षण
मेले के दौरान स्वामी विवेकानंद चिकित्सालय की ओर से स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर मेलार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। एम्स ऋषिकेश के 12 चिकित्सकों ने लगभग तीन सौ मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। बंड मेला समिति की ओर से सभी चिकित्सकों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया।
खूब बिके हस्तशिल्प
बंड मेले में किरूली गांव के प्रदीप कुमार की ओर से बनाए गए मंदिर के डिजायनों की खूब बिक्री हुई। प्रदीप कुमार हस्तशिल्प कला के बेजोड़ कलाकार हैं। उन्होंने बदरीनाथ, केदारनाथ मंदिर सहित विभिन्न पौराणिक मंदिरों के डिजायन तैयार किए हैं। साथ ही रिंगाल से बनाए डिजायन वस्तुओं की भी लोगों ने खूब खरीदारी की।