उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से श्रीदेव सुमन विवि के गोपेश्वर परिसर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान नई शिक्षा नीति में गढ़वाली बोली-भाषा को भी जोड़ने पर जोर दिया गया।
अकादमिक शोध एवं परीक्षण उत्तराखंड की निदेशक सीमा जौनसारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में स्थानीय बोली भाषा को जोड़ा जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी को इसका ज्ञान मिल सके। इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि समय के साथ लुप्त हो रही चीजों को तार्किक आधार पर संरक्षित करने की जरूरत है। जागर गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि गढ़वाल के लोक गीतों के संरक्षण के साथ ही संस्कृति के संरक्षण के लिए सभी को आगे आने की आवश्यकता है। प्राचार्य प्रो. आरके गुप्ता ने एनएसएस के स्वयंसेवकों से अपनी संस्कृति को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया। इस मौके एनएसएस की कार्यक्रम अधिकारी डा. पूजा राठौर, डा. भालचंद नेगी, डा. एके सैनी और डा. वंदना लोहनी आदि मौजूद थे।