भगवान रुद्रनाथ के कपाट 17 अक्तूबर को रात आठ बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। सोमवार को भोग लगाने के बाद डोली श्रद्धालुओं के साथ गोपीनाथ मंदिर पहुंची।
चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की डोली सोमवार को शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हो गई। इस दौरान मंदिर परिसर में विधि-विधान से विशेष पूजाएं की गईं। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर भेंट अर्पित की और बम-बम भोले के जयकारे लगाए। अब शीतकाल में छह माह तक रुद्रनाथ भगवान के दर्शन गोपीनाथ मंदिर में होंगे।
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भगवान रुद्रनाथ के कपाट 17 अक्तूबर को रात आठ बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। 18 अक्तूबर को डोली ग्वाड़ गांव के जाख मंदिर होते हुए ज्वाला मंदिर देवलधार पहुंची। सोमवार को भोग लगाने के बाद डोली श्रद्धालुओं के साथ गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई।
शाम करीब छह बजे गणेश मंदिर होते हुए डोली गोपीनाथ मंदिर पहुंची। यहां परिक्रमा के बाद डोली को त्रिशूल के सामने दर्शनार्थ रखा गया। पंडित हरीश भट्ट ने पूजा संपन्न कराई। इसके बाद शाम करीब सात बजे डोली को मंदिर में विराजमान किया गया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष मनोज भट्ट सहित शांति प्रसाद भट्ट, वेदप्रकाश, मनीष नेगी, महेंद्र सिंह नेगी, देवेंद्र सिंह बिष्ट, सतेंद्र सिंह और योगी नेगी मौजूद रहे।