श्री लक्ष्मीनारायण पर्यटन, सांस्कृतिक एवं विकास मेले के पहले दिन आस्था और संस्कृति का समागम दिखा। भगवान नारायण को समर्पित गीत से मेले का शुभारंभ हुआ और लोक संस्कृति परंपराओं पर आधारित गीतों ने दिनभर मेले में समा बांधा।
किमोली में मंगलवार से शुरू हुए 11वें श्री लक्ष्मीनारायण पर्यटन, सांस्कृतिक एवं विकास मेले के पहले दिन ग्रामीणों ने सबसे पहले मंदिर में मत्था टेक पूजा अर्चना की। इसके बाद मेला पांडाल में आयोजित स्कूली, महिला मंगल दलों और सांस्कृतिक संस्थाओं के कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
मेला परिसर में सुबह साढ़े सात बजे स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। जिसके बाद धनसारी के पंडित गोपाल दत थपलियाल और प्रदीप थपलियाल ने लक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा अर्चना की। पूजा अर्चना के बाद मेला मैदान में हाईस्कूल उमासैंण के प्रधानाचार्य पीतांबर दत खंडूड़ी ने ध्वजारोहरण किया।
मेले का उद्घाटन करते हुए विधानसभा के उपाध्यक्ष डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने कहा कि मेले पहाड़ की पौराणिक संस्कृति और परंपराओं के संवहन का माध्यम है। इस अवसर पर मेला समिति के अध्यक्ष खिलदेव सिंह रावत, उतम तोपाल, गौचर नगर पालिका के अध्यक्ष मुकेश नेगी, ज्येष्ठ उप प्रमुख गौतम मिंगवाल, राकेश नेगी, विजय कंडवाल, लक्ष्मण पटवाल आदि लोग मौजूद थे।
लक्ष्मीनारेण का ऐगा मंदीर....
कर्णप्रयाग। लक्ष्मीनारेण का ऐगा मंदीर, मां हम तें द्ये तू आशीर्वाद ....छांतेश्वर कला मंच की लोक गायिका पूजा आर्य के इस भजन की प्रस्तुति पर मेला परिसर भगवान लक्ष्मीनारायण के जयकारों से गूंज उठा। इसके अलावा पूजा आर्य और विक्रमादित्य ने मैं लागी सुआ, घुट घुट बाडुली लागी.. सहित अन्य लोक गीतों और नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दी। लोक गायक जितेंद्र कुमार ने भी नंदा की स्तुति गाई।
मंदिर में पूजा से होती है पुत्र की प्राप्ति
कर्णप्रयाग। किमोली गांव में स्थित पौराणिक लक्ष्मीनारायण मंदिर की मान्यता है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिर में अखंड रात्रि तक पूजा अर्चना करने पर पुत्रहीन दंपतियों की पुत्ररत्न की प्राप्ति होती है। यहां कपीरी पट्टी के 24 से अधिक गांवों के लोग कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहां पहुंच कर पूजा अर्चना करते हैं।