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संस्कृति के संरक्षण के लिए सबको आना होगा आगे : मुकुंदानंद

Fri, 15 May 2026 06:54 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
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बदरीनाथ में हुए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोले ज्योतिषपीठ के दंडी स्वामी
संवाद न्यूज एजेंसी
बदरीनाथ। विभिन्न संस्थाओं की ओर से बदरीनाथ में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन मुख्य अतिथि ज्योतिषपीठ के दंडी स्वामी चैतन्य मुकुंदानंद गिरि ने संस्कृत भाषा की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संस्कृत मातृभाषा से मृत भाषा हो गई है। इसके संरक्षण के लिए हम सबको आगे आकर विशेष प्रयास करने होंगे।
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बदरीनाथ धाम में उत्तराखंड संस्कृत विवि, केंद्रीय संस्कृत विवि देवप्रयाग और सोबन सिंह जीना विवि की ओर से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा : दिव्य भूमि बदरीकाश्रम विषय पर आयोजित सम्मेलन में 22 राज्यों के 450 शिक्षाविद् शोधार्थी शामिल हुए। मुख्य अतिथि ज्योतिषपीठ के दंडी स्वामी मुकुंदानंद गिरि ने कहा कि सनातन धर्म के आदि पुरुष शंकराचार्य हैं। उन्होंने तत्कालीन समय में अलग-अलग मतों में विभाजित लोगों को एक सूत्र में पिरोया। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने बदरीनाथ के महात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा किबदरीनाथ में पंच बदरी, पंचधाराएं, पंच शिला और पंच कुंड विराजमान हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश मेहता ने कहा कि देश के विद्वानों के साथ हर साल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। संचालन डॉ. प्रदीप सेमवाल ने किया। डॉ. मनोज बिश्नोई ने बताया कि सम्मेलन में 200 शोध पत्र पढ़े गए। इस दौरान शिवानंद उनियाल, डॉ. जनार्दन नौटियाल, कृष्णा नंद पंत, कुशाग्र, शैलेश ध्यानी आदि मौजूद रहे।
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