गोपेश्वर पीजी कालेज में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते वक्ता।
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श्रीदेव सुमन विवि के गोपेश्वर कैंपस में शिक्षा में कला एवं अभिनय अभिव्यक्ति एवं रचनात्मकता का प्रभावी माध्यम विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला शुक्रवार से शुरू हुई। कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि भारत में नैतिकता और मर्यादित शिक्षा को ही प्राथमिकता दी जाती है।
बीएड विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष सुरेंद्र लाल ने किया। उन्होंने कहा कि रंगमंच सम्प्रेषण एवं संवाद का सशक्त माध्यम है। कलात्मक प्रस्तुति से शिक्षा का व्यापक प्रचार प्रसार भी होता है। पूर्व सांसद प्रतिनिधि रघुवीर बिष्ट ने कहा कि शिक्षा के केंद्र ही नए भारत के मंदिर हैं जहां से नैतिकता एवं मर्यादा की शिक्षा दी जाती है। ओमप्रकाश भट्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लोकगीतों एवं नुक्कड़ नाटकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तकनीकी सत्र में संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के सदस्य एवं उत्सव ग्रुप के निदेशक रंगकर्मी डा. राकेश भट्ट ने कहा कि रंगमंच ही जीवन में रोचकता पैदा करता है। हमारे शरीर का हर अंग अभिनय करता है। कार्यशाला के आयोजक डा. बीसी शाह ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में अभिनय एवं कला का विशिष्ट स्थान है और इसी से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. आरके गुप्ता, डा. सुरेश ममगाईं, डा. मनोज उनियाल, डा. सुशील बहुगुणा, डा. अखिलेश कुकरेती, डा. ममता असवाल, डा. अशोक कुमार, डा. अखिल चमोली आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन मीडिया कोऑर्डिनेटर डा. दर्शन सिंह नेगी ने किया।