विस्थापितों के गांव दीदना में पहली बार बिजली पहुंची तो गांव वासियों की आंखों में खुशियों के बल्ब जल उठे। उन्होंने मिठाई बांटकर बिजली पहुंचने की खुशी मनाई और समारोह का आयोजन कर ऊर्जा कर्मियों को सम्मानित किया।
दो साल पहले यानी 2018 की आपदा से कुलिंग गांव धस गया था। ग्रामीणों की मांग पर यहां के लोगो को प्रशासन ने चार किलोमीटर दूर दीदना तोक में विस्थापित किया था। यह जगह पर्यटन स्थल आली बुग्याल से छह किलामीटर पहले है। यहां पर्यटकों के रुकने के लिए होमस्टे भी बने है। इस रूट से पर्यटक आली और वेदनी बुग्याल जाते है।
सावन के पहले सोमवार को ऊर्जा निगम ने गांव में बिजली की सप्लाई शुरू कर दी। फिलहाल निगम ने गांव में लगे बिजली के पोल और सार्वजनिक स्थानों पर बल्ब लगाकर गांव को रोशन कर दिया है।
ग्रामीणों ने लाइन डालने वाले प्रदीप सिंह, देवेंद्र सिंह, पदम सिंह, लक्ष्मण सिंह, हीरा सिंह, भरत सिंह, बलबीर सिंह, विजय प्रकाश और मोहन सिंह को सम्मानित किया। इस समारोह में भुवन बिष्ट, महिपत दानू, देव सिंह दानू, प्रेम सिंह, धरमा देवी, नंदी देवी, बसंती देवी, पुष्पादेवी आदि शामिल रहे।
चार किमी पैदल चल पहुंचाया ट्रांसफार्मर
दीदना में बिजली और सड़क की मांग सालों से की जा रही थी। आखिर ऊर्जा निगम ने उनकी सुनी। एक सप्ताह पहले ग्रामीणों के सहयोग से चार किलोमीटर पैदल चलकर ट्रांसफार्मर पहुंचाया गया।
होम स्टे होंगे रोशन, मिलेगा रोजगार
बिजली पहुंचने से दीदना के होमस्टे भी रोशन होंगे। यहां पर्यटक भी रुकेंगे। अब सड़क और बन जाए तो यह गांव राज्य का सबसे सुंदर पर्यटन गांव बनेगा। लोहजंग-कुलिंग-दीदना-आली-वेदनी रूट पर पर्यटकों की संख्या बढेगी। इससे रोजगार भी पैदा होगा।
-भुवन बिष्ट, पूर्व प्रधान, कुलिंग
दीनदयाल योजना के तहत दीदना गांव तक बिजली पहुंचाई गई है। कुलिंग से साढ़े चार किलोमीटर की लाइन बनाकर ऐसा किया गया। यहा पर कुलिंग गांव के प्रभावितों को जल्द कनेक्शन देकर सभी घरों को रोशन किया जाएगा।
-अतुल कुमार, एसडीओ, ऊर्जा निगम