बैसाखी पर्व के उपलक्ष्य में पिंडरघाटी के देवी-देवताओं की डोलियों ओर निशाणों ने पंती और कुलसारी में पिंडर नदी में स्नान किया। इसके साथ ही शनिवार से कई जगहों पर मेलों का आयोजन भी होगा।
शुक्रवार को कोब गांव से कोबेश्वर महादेव, मींग से मीगेंश्वर महादेव, माल से मालेश्वर महादेव तथा असेड़ से महामृत्युंजय महादेव की डोलियां और अन्य कई देवताओं के निशाण गाजे-बाजे, भंकोरों की नाद के साथ पंती में पिंडर नदी में स्नान के लिए पहुंचे। वहीं कुुलसारी में मेल्ठा, माल-बज्वाड़ से मलियाल देवता तथा मैटा-भटियाणा की कुंआरी देवी की उत्सव डोलियों ने भी गंगा स्नान किया।
उसके बाद कुलसारी की पौराणिक सिद्धपीठ कालिंका देवी मंदिर में विराजमान र्हुइं। देवी देवताओं के पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसके बाद सभी देवी देवता मंदिर की परिक्रमा कर अपने गंतव्य को रवाना हुए।
वहीं बैसाखी का मेला कोब, मींग तथा माल में 15 अप्रैल को होगा। 16 को खैनोली में, 17 को असेड़ में तथा 18 को मलियाल में होगा। 10 मई को कुआंरी मेले के साथ ही पिंडरघाटी में मेलों का समापन हो जाएगा।
भूमियाल त्यूंणा देवता को लगाया नए अनाज का भोग
बैसाखी के पर्व पर श्री बदरीनाथ धाम के डिमरी पुजारियों ने डिम्मर और नाकोट गांव की सीमा पर स्थित भूमियाल त्यूंणा देवता की पूजा कर उन्हें नए अनाज का भोग लगाया। पंडित हेमचंद्र डिमरी, संदीप डिमरी, राकेश चंद्र ने त्यूंणा देवता से संपूर्ण क्षेत्र की कुशलता की कामना की।
इस मौके पर रविंद्र खंडूड़ी, नरेश चंद्र खंडूड़ी, हरीश चंद्र डिमरी, शशिकांत डिमरी, शोभित, लक्की, बिन्नी सहित डिम्मर, नाकोट, नागों, रेखाल, बिरईधार आदि गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।