वर्ष 2013 की आपदा से क्षतिग्रस्त अलकनंदा के घाटों की स्थिति आज तक नहीं सुधर पाई है, जिस कारण प्रयागों में स्नान के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में अलकनंदा नदी पर करीब छह से अधिक स्नानघाट वर्तमान में क्षतिग्रस्त पड़े हैं। ऐसे में घाटों पर लोग जान जोखिम में डालकर स्नान करने पहुंच रहे हैं। वर्ष 2013 की जल प्रलय के दौरान अलकनंदा के विष्णु प्रयाग, बिरही, हाट, चमोली और नंदप्रयाग स्थित स्नान घाट क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते दो साल बाद भी स्नान घाटों का सुधारीकरण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। नंदप्रयाग में नंदा वन भी अलकनंदा की चपेट में आ गया था, लेकिन आज तक यहां सुंदरीकरण शुरू नहीं हो पाया है। अनुराज वर्मा, विनय सेमवाल और नवल भट्ट का कहना है कि सरकार सिर्फ आपदा से उबरने के दावे कर रही है, जबकि धरातल पर स्थितियां अभी विकट बनी हैं। नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत का कहना है कि चमोली स्नानघाट के सुधारीकरण के लिए आपदा प्रबंधन विभाग तथा पर्यटन विभाग को प्रस्ताव भेजे गए हैं। पर्यटन विभाग से स्नानघाट सुधारीकरण के लिए पांच लाख भी शासन से स्वीकृत हुए हैं, लेकिन अभी तक धनराशि नहीं मिल पाई है।