जैसाल गांव में सात दिनों से चल रहा बगड्वाल नृत्य धार्मिक परंपराओं के साथ रविवार को संपन्न हो गया। भक्तों ने नम आंखों के साथ अपने आराध्य देव बगड्वाल परिवार को विदाई दी।
जैसाल गांव में हर तीन साल में बगड्वाल नृत्य का आयोजन होता है। मान्यता है कि कालांतर में जीतू बगड्वाल नाम के व्यक्ति के साथ ही उसके संपूर्ण परिवार को वन देवियां मूर्छित कर अपने साथ ले जाती हैं। उस दौरान वे खेतों में धान की रोपाई कर रहे थे। तब से क्षेत्र के ग्रामीण जीतू बगड्वाल और उनके परिवार को देवता के रूप में पूजते हैं। ढोल-दमाऊं की थाप पर बगड्वाल परिवार अवतारी पुरुषों पर नृत्य करता है। आयोजन में शामिल होने के लिए प्रवासी ग्रामीण भी अपने गांव पहुंचे। इस मौके पर होरी जैसाली, जगदंबा प्रसाद पुरोहित, ललित मोहन, लक्ष्मीकांत, विनोद प्रसाद, संजय जैसाली, राजेंद्र हटवाल, दीपक पंत, शिवम सती आदि मौजूद थे।
लंगटाईं गांव में पांडव लीला शुरू
आदिबदरी। सिलपाटा क्षेत्र के लंगटाईं गांव में छह दिवसीय पांडव लीला शुरू हो गई है। पहले दिन पांडव चौक में पंडित मनसज सती ने द्वार व बांणों की पूजा की। उसके बाद कुंती माता अवतरित र्हुइं। नृत्य देखने आए भक्तों ने कुंती से धन धान्य का आशीर्वाद मांगा। पांडवों ने ढोल दमाऊं के 36 तालों पर 16 कलाओं पर आकर्षक नृत्य किया। पण्डवांणी गायक कुताल सिंह के साथ बचन नेगी ने महाभारत के आख्यानों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर पज्यांणा, प्यूंरा, डोल्टू, चोरड़ा, छिमटा, बेड़ी, सुगढ, नगली, भलसों, ढमकर सहित कई गांवों के श्रद्धालु पांडव लीला देखने पहुंचे। मालगुजार गोविंद सिंह व प्रधान रेखा देवी ने बताया कि छह दिनों तक पांडव लीला जारी रहेगी। आगामी 26 दिसंबर को पांडव लीला का समापन होगा। समापन पर यज्ञ और भोज का आयोजन होगा। संवाद