राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि यह आपदा मानव जनित थी। विकास के नाम पर विनाश नहीं होना चाहिए। यहां आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्य सभा सांसद ने कहा कि हिमालय के मुहाने पर बन रही जल विद्युत परियोजनाओं के बारे में फिर से विचार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि रेस्क्यू कार्य में सालों पुरानी जेसीबी से काम चल रहा है। आपदा के एक दिन बाद एनडीआएफ पहुंचती है, लेकिन उनके पास अत्याधुनिक उपकरण नहीं थे। सरकार को बेहतर से बेहतर तकनीकी का उपयोग कर वहां पर बचाव कार्य करना चाहिए। इससे पूर्व राज्य सभा सांसद ने पर्यावरणविद् चंडीप्रसाद भट्ट से उनके आवास पर मुलाकात कर ऋषिगंगा में आई आपदा को लेकर चर्चा की। चंडीप्रसाद भट्ट ने कहा कि आपदा के बाद उसके कारणों को बताने के बजाय पहले ही हिमालय का अध्ययन हो ऐसा प्रयास होना चाहिए। ग्लेशियर पीछे खिसकने का आम जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। इस मौके पर पृथ्वीपाल सिंह चौहान, बार संघ के पूर्व अध्यक्ष नंदन सिंह बिष्ट, भगवती प्रसाद भट्ट, संदीप झिंक्वाण, महेंद्र नेगी और भगत बिष्ट मौजूद रहे।
घाट आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सांसद प्रदीप टम्टा
घाट। नंदप्रयाग-घाट सड़क डेढ़ लेन करने की मांग को लेकर लोगों का धरना 72वें दिन भी जारी रहा, जबकि भूख हड़ताल शुरू किए 36 दिन हो चुके हैं। रविवार को राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा आंदोलन को समर्थन देने के लिए घाट पहुंचे। उन्होंने लोगों की मांग का समर्थन करतेहुए कहा कि इस मार्ग की जो स्थिति है उसे देखते हुए डेढ़ लेना बनाया जाना चाहिए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन भी सौंपा। उनके साथ पृथ्वी पाल चौहान, तेजबीर कंडेरी आदि मौजूद थे।
वहीं भूख हड़ताल में बीडीसी सदस्य हरीश रावत, प्रकाश भंडारी और हरीश कुमार बैठे हैं। इससे पहले भूख हड़ताल पर बैठे अन्य लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनके स्थान पर यह तीन लोग बैठे हुए हैं। वहीं व्यापार संघ के राजेंद्र सिंह, मनोज कुमार, टैक्सी यूनियन से प्रेम सिंह, साबर सिंह, स्थानीय निवासी महाबीर सिंह, सतेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, पुष्कर सिंह, ममता देवी, शांति देवी, कमल देवी, मंजू देवी आदि धरने पर बैठे हुए हैं। संवाद