स्यूण-बेमरू-मठ-झड़ेता विकास संघर्ष समिति ने झूला पुल बनाने और मठ गांव के नीचे हो रहे भूस्खलन रोकने के लिए उपाय करने की मांग की है। समिति ने कहा कि भूस्खलन से मठ गांव की 200 नाली नाप भूमि तबाह हो चुकी है, जिससे गांव को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने की मांग भी उठाई और इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
समिति के अध्यक्ष बहादुर सिंह, स्यूण की ग्राम प्रधान मनोरमा देवी, महिला मंगल दल की अध्यक्ष कमला देवी, भागीरथी, विनीता देवी, उर्गम की प्रधान मिंकल देवी और भर्की की प्रधान मंजू देवी का कहना है कि मैनागाड नदी पर पुल निर्माण के लिए वर्ष 2019 में शासन से स्वीकृति मिली थी, लेकिन कोविड के चलते पुल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। इस पुल के बनने से दशोली और जोशीमठ ब्लाक के करीब 23 गांवों को लाभ मिलेगा। जिसमें दशोली ब्लॉक के स्यूण, बेमरू और मठ झड़ेत के 11 गांव और जोशीमठ ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायत कलगोठ, किमाणा, जखोला, पोखनी, द्विंग के गांव शामिल हैं। समिति ने मठ-झड़ेता ग्राम पंचायत के ग्राम मठ के नीचे चार सालों से हो रहे भूस्खलन के ट्रीटमेंट की मांग भी उठाई।