शराब के ठेकों को निरस्त करने और ब्लाकों को शराब मुक्त बनाने की मांग को लेकर कर्णप्रयाग में दूसरे दिन और देवाल में 20वें दिन धरना जारी रहा। धरने पर बैठी महिलाओं और युवाओं ने कहा कि शराब को किसी भी हालात में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तहसील परिसर में शराब विरोधी संघर्ष समिति की अध्यक्ष अंशी नेगी के नेतृत्व में धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि जगह-जगह शराब के ठेके खुलने से युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में है। अब जरूरत शराब मुक्त गांवों को स्थापित करने की है।
सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक आयोजित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन में बृजेश बिष्ट, कुंवर सिंह, अनूप चौहान, पुष्कर रावत, भुवन नौटियाल, देवराज रावत सहित सिरण, कालेश्वर और आसपास के गांवों की महिलाएं शामिल थीं। दूसरी ओर देवाल को शराब मुक्त ब्लाक बनाने की मांग को लेकर महिलाओं का धरना प्रदर्शन 20वें दिन भी जारी रहा। महिलाओं में बाजार में प्रदर्शन किया।
धरना-प्रदर्शन में ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट, संघर्ष समिति के अध्यक्ष हीरा देवी पांगती, उपाध्यक्ष हिमांती बिष्ट, कोषाध्यक्ष कमला राणा, सचिव कलावती परिहार, उमा देवी, पुष्पा, दीपा, सुनीता, बेनी , रेनू, चंपा, देवकी, हिमांती, कमला, गणेशी और प्रभा सहित कई महिलाएं शामिल थीं।
ठेके खोलने के बजाय क्षेत्र में डॉक्टर और शिक्षक भेजें
अंग्रेजी शराब की दुकान बंद करने की मांग को लेकर महिलाओं का आंदोलन तेज होता जा रहा है। बृहस्पतिवार को सैंती और फाली गांव की महिलाओं ने अंग्रेजी शराब की दुकान के बाहर शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर धरना दिया। महिलाओं के आंदोलन के कारण तीन दिनों से घाट बाजार स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान नहीं खुली।
धरना स्थल पर हुई सभा में महिला संघर्ष समिति की अध्यक्ष रुचि देवी ने कहा कि सरकार शराब की दुकान के बजाय घाट क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों को सुविधा संपन्न बनाए। अस्पताल में डॉक्टर और स्कूलों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरा जाए।
महिलाओं ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र ठेके को बंद कराने की मांग उठाई। सैंती गांव की कलावती ने कहा कि शराब के बजाय युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाएं। इस मौके पर दीपा देवी, कलावती, पारेश्वरी, मुन्नी देवी, सतेश्वरी, सुशीला, विमला, मंगसीरी देवी, केदारी देवी, रश्मि, बुदली, संगीता, दशमी, मथुरा, मंजू, हेमा, सरस्वती, कला, दीपक रतूड़ी, बिज्जू बिष्ट, विजय पुरोहित और यशपाल सिंह आदि मौजूद थे।