उफनता नाला सौरभ के साथ ही उसके सपनों को भी बहा ले गया। सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना रखने वाला सौरभ भारतीय सेना की भर्ती में पहली बार में ही सफल हुआ और अब लिखित परीक्षा की तैयारी में जुटा था। आठ दिन बाद उसकी लिखित परीक्षा होनी थी, लेकिन इससे पहले ही वह दुनिया छोड़ चला गया।
सोमवार को सांय साढ़े सात बजे माणखी गांव के समीप खोड़ा गदेरे में बहे बीस वर्षीय सौरभ का शव मंगलवार को ग्रामीणों और तहसील प्रशासन की टीम ने गदेरे से निकाल दिया। सौरभ सती (20) पुत्र चक्रधर सती का शव मंगलवार को पोस्ट मार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। दोपहर बाद परिजनों ने नंदाकिनी नदी के तट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया है। सौरभ के निधन पर घाट और माणखी बाजार बंद रहे।
बचपन से ही सौरभ के मन में सेना में भर्ती होकर देश सेवा की ललक थी। इसी जज्बे के चलते बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद बीते अप्रैल माह में वह रुड़की में भारतीय सेना की भर्ती में शामिल हुआ और पहली बार में ही सफल हो गया था।
सौरभ के पिता चक्रधर सती भी पूर्व सैनिक हैं। सेना में भर्ती होने के बाद वह इन दिनों अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों को इकटठा करने में लगा हुआ था। सोमवार को भी सौरभ इसी सिलसिले में गोपेश्वर आया हुआ था। सांय को वह बारिश के दौरान घर लौट रहा था कि कांडई-माणखी सड़क पर उफनाए नाले में वह बह गया।
सौरभ के जीजाजी देव बमोला का कहना है कि उन्होंने सौरभ को आगे भी पढ़ाई जारी रखने की सलाह दी थी, लेकिन उसके मन में सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का जज्बा था। सौरभ चार भाईयों में सबसे छोटा था। उसकी अकाल मौत के बाद उसकी मां बदहवास पड़ी हुई है।