पिछले वर्ष घर से गायब और मारपीट के मामले में पीड़ित मूक बधिर युवती का बयान दर्ज कराने के लिए जिला प्रशासन मूक बधिर एक्सपर्ट की टीम बुलाने की तैयारी कर रहा है। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) और पुलिस प्रशासन ने कहा कि बयान दर्ज न होने के कारण आरोपियों के खिलाफ मामला साबित करना टेढ़ी खीर बना हुआ है।
बीते वर्ष 25 अगस्त को तहसील गैरसैंण में एक गूंगी युवती रात को अपने घर से गायब मिली। परिजनों के ढूंढने पर घर से थोड़ी दूरी पर एक खेत के किनारे मिली। उसके हाथ-पांव बंधे हुए थे। मामले की गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने 30 अगस्त को मामला राजस्व से रेगुलर पुलिस को हस्तांतरित करवा दिया।
पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लिया। लेकिन अब आठ माह बाद भी मामले में पीड़िता के बयान दर्ज न हो पाने के कारण कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई है। जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) एसके डिमरी को शीघ्र मूक-बधिर एक्सपर्ट के माध्यम से पीड़िता के बयान दर्ज करवाने का आश्वासन दिया है।
वहीं, थराली में भी गूंगी युवती के साथ मारपीट के मामले में पीड़िता के गूंगी होने के चलते कानूनी कार्रवाई में अड़चनें आ रही हैं। इससे न्यायालय और पुलिस प्रशासन को आगे की कार्रवाई करने में खासी दिक्कतें हो रही हैं।