विभिन्न गांवों और निर्जन पड़ावों से होते हुए मंगलवार को हिमालय क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा कैलास के लिए विदा हो गईं। उच्च हिमालय क्षेत्र वेदनी बुग्याल और बालपाटा बुग्याल में मां नंदा की विशेष पूजा हुई। इसके साथ ही मां नंदा की लोकजात यात्रा भी संपन्न हो गई है।
12 अगस्त को सिद्धपीठ कुरुड़ से दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियों ने कैलास के लिए प्रस्थान किया था। विभिन्न गांवों और निर्जन पड़ावों से होते हुए मंगलवार को नंदा सप्तमी के पर्व पर बधाण की मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली गैरोली पातल से होते हुए वेदनी बुग्याल पहुंची। यहां मां नंदा की डोली ने वेदनी कुंड की परिक्रमा की। इसके बाद मां नंदा की विशेष पूजा की गई। एक घंटे तक चली पूजा के बाद मां नंदा को कैलास विदा कर भक्तगण लौट आए। वहीं, दशोली की मां नंदा रामणी गांव से विदा लेने के बाद बालपाटा बुग्याल पहुंची। इधर, नरेला बुग्याल में बंड क्षेत्र की मां नंदा की छतोली की पूजा हुई। भक्तों ने मां नंदा को शृंगार सामग्री और समौण भेंट की। इस मौके पर प्रकाश गौड़ और प्रदीप नेगी मौजूद थे।
घाट की मां नंदा पहुंची वांक गांव
देवाल। नंदा लोकजात यात्रा व मां नंदा की डोली वेदनी में पूजा के वाद आली बुग्याल होते रात्रि विश्राम के लिए वांक गांव पहुंची। वेदनी कुंड में श्रद्धालुओं ने स्नान कर अपने पितरों को तर्पण दिया। प्रशासन की रोक के बाद भी वेदनी में पुजारियों के अलावा लगभग सौ लोग पहुंचे। डोली एक सितंबर को देवराड़ा मंदिर में पहुचेगी।
14 अगस्त घाट ब्लाक के कुरूड़ मंदिर से चली नंदा की डोली यात्रा मंगलवार की सुबह गैरोली पातल से वेदनी पहुंची। वेदनी में डोली के पहुंचने पर श्रद्धालुओं के जय जयकार से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया। कुंड व गौरी शंकर मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करने के बाद डोली को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया। ब्रह्मकमल से मां नंदा की पूजा की गई। श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में ब्रह्मकमल दिया गया। इसके बाद डोली देर शाम को वांक गांव पहुंची। संवाद