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गढ़ कुमांऊनी और भोजपुरी संस्कृति के छाए रंग

Thu, 19 Nov 2015 07:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
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गौचर मेले की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में गढ़ कुमांऊनी और भोजपुरी संस्कृति का रंग छाया रहा। श्री बदरी केदार सांस्कृतिक कला मंच गौचर, सूचना एवं संस्कृति विभाग देहरादून, हिम तरंग लोक कला संस्था गौचर और भोजपुरी गायक सुरेश कुशवाहा की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समा बांधे रखा।
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श्री बदरी केदार सांस्कृतिक कला मंच गौचर और हिम तरंग लोक कला संस्था गौचर के कलाकारों ने रुमा झुमा वाली संध्या ऐगे, कब आलू मंगसीर मैना और ऐगे ऋतु बैंणा कफुआ बास लगी बैंणा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत की।

 संस्था के गायक कांति प्रसाद डिमरी ने समद्योला का द्वि दिन समल्णायां हवे गेनी, लीला भंडारी ने बंगला देश काला डांडा लडै लगी च गीतों की शानदार प्रस्तुति दी।
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सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग देहरादून के कलाकारों ने गयलि बौ दूदा लख गयलि, खै जाली मांजी डाली की बेर, मी दगडी चल मि छौं मिलटरी को छोरा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। गोरखपुर कुशीनगर से आए भोजपुरी गायक सुरेश कुशवाहा ने शिव वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

उन्होंने कहा कि एक कलाकार लखनऊ से मुहब्बत पाने के लिये यहां पहुंचा है। सुर साज और संगीत की समरसता से सुरेश कुशवाहा ने शिव नृत्य, हे भोले बाबा तू इतना बत्इला, पांव में पायलिया सोहे, हाथ में कंगंवा की रोचक प्रस्तुति दी।

तीन लोक में दृष्टि सारी, सृष्टि सार समाये, मस्त मलंगा रहने वाले तेरी शक्ति न जाने कोई, लग्ई ला तू जब तू लिप्स्टी, हिलेला सारा डिस्टिक गीतों पर आधी रात तक लोग पांडाल में जमे रहे।

इस मौके पर एसडीएम विवेक प्रकाश, पालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी, मंडी समिति अध्यक्ष संदीप नेगी, विजय प्रसाद डिमरी, इंदु पंवार, महादेव बहुगुणा, सुनील पंवार, ताजबर कनवासी, विशेष बिष्ट आदि मौजूद रहे। संचालन रमेश सिदोला और अर्जुन नेगी ने किया।
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