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पुंगडी बांजी और कूड़ी बन्द...

Tue, 01 Mar 2016 09:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
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 ब्लाक मुख्यालय पर चकबंदी दिवस रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। राजकीय इंटर कालेज के खेल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक कृषि के साथ संस्कृति बचाने की अपील की।
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 चकबंदी के गीत पुंगडी बांजी और कूड़ी बन्द, यू कन बणी हमारो उत्तराखंड... से प्रदेश में पलायन और खाली होते गांवों के साथ बंजर होती खेती की पीड़ा उकेरी।

कार्यक्रम में चकबंदी के विशेषज्ञ गणेश सिंह गरीब ने कहा कि पहाड़ी राज्यों की कृषि की परिकल्पना बिना चकबंदी के संभव नहीं है।

अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय भी उत्तराखंड क्षेत्र की चकबंदी पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार नहीं हो पाई, जिससे पहाड़ों से पलायन को बढ़ावा मिला, जो आज भी जारी है। कहा कि पहाड़ों में कृषि उत्पादन 50 प्रतिशत तक घट गया है।

चकबंदी सलाहकार के अध्यक्ष केदार सिंह रावत ने कहा कि कुछ खामियों के कारण चकबंदी योजना पहाड़ों में पूर्ण रूप  से सुचारु और सफल नहीं हो पाई। रावत ने पर्वतीय क्षेत्रों में किसान विद्यालय खोलने की मांग भी की। इस अवसर पर राजकीय इंटर कालेज और स्कूली छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
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 कार्यक्रम में रविंद्र कुंवर, दीपक रावत, रामकृष्ण पोखरियाल, गजेंद्र नौटियाल, प्रदीप भट्ट, योगंबर रावत, चतुर सिंह, जानकी रावत, सुमति विष्ट, मोहन नेगी, संजय बुड़ाकोटी, गजेंद्र नौटियाल, महाराष्ट्र से आए नितिन पंवार, कुलदीप नेगी और दिगंबर रावत आदि मौजूद थे।

कृषि यंत्रों और बीजों के लगे स्टॉल
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग ने आयोजन स्थल पर स्टॉल लगाकर किसानों को विभिन्न जानकारियां दीं। कृषि अधिकारी दिवाकर दत्त पुरोहित ने बताया कि स्टॉल में कृषकों को अनुदान पर कृषि यंत्र और दवाइयां सहित बीज बांटे गए।

नहीं पहुंचे कृषि मंत्री
चकबंदी दिवस पर कृषि मंत्री डा. हरक सिंह रावत को पहुंचना था, लेकिन वह नहीं पहुंचे। भाजपा नेता टीका प्रसाद मैखुरी ने कहा कि गैरसैंण को लेकर कांग्रेस सरकार और उसके मंत्री (डा. हरक सिंह) विवादों में रहे हैं। जिसके लिए कांग्रेस अब गैरसैंण से परहेज कर रही है।
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