कर्णप्रयाग/देवाल। शुक्रवार को कर्णप्रयाग, सिमली, देवाल, थराली, गौचर, आदिबदरी, गैरर्सैंण, नारायणबगड़ में शारदीय नवरात्र के छठवें दिन देवी की माँ कत्यायनी के रूप में पूजा अर्चना की गई।
कर्णप्रयाग के उमा देवी मंदिर में भक्तों ने देवी के दिव्य दर्शन किये और धूप-दीप से मां उमा की पूजा कर नैवेद्य अर्पित किया। महिलाओं ने देवी को चूड़ी, बिंदी, नथ सहित अन्य शृंगार सामग्री भेंट की। पुजारी गांव और शक्ति नगर की महिलाओं ने मंदिर में भजन कीर्तन किए और पारंपरिक मंगलगीत गाए। मंदिर के पुजारियों ने देव भव्य आयोजन कर देवी के सम्मुख नवरात्रि पाठ किया। सिमली और लंगासू के चंडिका देवी मंदिरों में सेनू, सिमली, राड़खी, मजियाड़ी आदि गांवों से आई महिलाओं ने भजन कीर्तन कर चंडिका देवी की आराधना की। आदिबदरी में भगवान के दर्शनों को दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा।
देवाल में दस दिवसीय दुर्गा महोत्सव के मौके पर देव उत्सव का आयोजन हुआ। पंडित हंसा प्रसाद ने कहा कि मां कत्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री है। भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों नेे माता की पूजा की थी। मां कात्यायनी की पूजा से वैवाहिक जीवन की शुरूआत अच्छी होती है। इनकी उपासना से रोग, शोक और भय नष्ट होते है। साधक को आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति मिलती है। इस मौके पर दुर्गा महोत्सव समिति के अध्यक्ष कपूर मिश्रा, संयोजक नंद किशोर मिश्रा, कमलेश मिश्रा, कमला देवी, हेमादेवी, बीना देवी, हेम चंद्र, चंद्रमोहन मिश्रा, हरीश पांडे, उमेश मिश्रा, गणेश मिश्रा, राजा मिश्रा, सुरेंद्र सिंह, कैलाश चंद्र थे।
सैकड़ों भक्तों ने की मां नंदा की पूजा, दिव्य जोत के किए दर्शन
थराली। नवरात्रि के मौके पर सिद्धपीठ देवराड़ा में मां नंदा देवी की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भजन-कीर्तनों से गुंजायमान रहा। मां नंदा के मंदिर में कालरात्रि की विशेष पूजा अर्चना की गयी और भक्तों को गर्भ गृह में जल रही दिव्य ज्योति के दर्शन कराये गए। कुरूड़ के गौड़ ब्राह्मणों ने विधि-विधान से पूजा करने के साथ ही देवी के पश्वा अवतरित हुए। देव उत्सव में 30 से अधिक गांवों के लोग इस क्षण के साक्षी बने। भक्तों ने मां के जयकारे के साथ ही फूलों की वर्षा कर आशीर्वाद मांगा। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन हटवाल, धनीराम, राजेश्वर गौड़, राजगुरू गौड़, जगदीश पुरोहित, प्रताप सिंह, लाल सिंह, गौरी देवी, केदार पंत, धनराज रावत आदि थे।