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Chamoli News: फोटो आपदा प्रभावितों ने कहा हमारा वन टाइम सेटलमेंट करे सरकार

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रात को ही अपने असुरक्षित घरों पर लौट गए थे सिंहधार के आपदा प्रभावित, प्रशासन के आश्वासन पर लौटे
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मुआवजा राशि में भेदभाव करने की सूचना पर सिंहधार के आपदा प्रभावितों ने रविवार की पूरी रात अलाव के सहारे अपने क्षतिग्रस्त घरों की छत पर काटी। आपदा प्रभावितों का कहना है कि प्रशासन मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है, जिससे लोगों में आक्रोश बना है। सोमवार को सुबह तहसील अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के रेट के आधार पर सभी लोगों को एक समान मुआवजा दिया जाएगा। जिस पर संतुष्ट होकर लोग राहत शिविरों में लौट आए।


भू-धंसाव की जद में आए होटलों और घरेलू भवनों के मुआवजा राशि को लेकर आपदा प्रभावित असमंजस की स्थिति में है। आपदा प्रभावित दिगंबर सिंंह का कहना है कि राहत कैंप में सूचना फैली कि घरेलू भवनों के 27 सौ वर्ग फीट और होटलों का मुआवजा 33 सौ वर्ग फीट के मानक पर वितरित किया जा रहा है जिसे लेकर प्रभावितों में गुस्सा है। उन्होंने कहा कि मुआवजा राशि पर प्रशासन अपना रुख स्पष्ट करे। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने कहा कि मुआवजे को लेकर लगातार बैठकें आयोजित हो रही हैं, किसी को साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। शासन से जो भी दरें निर्धारित होंगी, उसके अनुसार सभी प्रभावितों को एक समान मुआवजा वितरित किया जाएगा।
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क्या कहते हैं लो



लगातार भू-धंसाव से तीन जनवरी को हमें राहत शिविर में शिफ्ट कर दिया गया था, आज 16 जनवरी हो गया है, लेकिन अभी तक भी घरों का मेजरमेंट कार्य पूरा नहीं हुआ है। हमारी मांग है कि क्षति का रेट बताया जाए। तहसील अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सभी लोगों को जल्द मुआवजा दिया जाएगा, अब आगे देखते हैं क्या होता है। दिगंबर सिंंह, प्रभावित सिंहधार वार्ड


सरकार मुआवजा देने में अनावश्यक देरी कर रही है। छोटे बच्चों के साथ राहत शिविर में बहुत सारी दिक्कतें आ रही हैं। हजारा जल्द से जल्द वन टाइम सेटलमेंट हो जाए तो हम अपनी इच्छानुसार विस्थापित हो जाएंगे। अंशु रावत, प्रभावित सिंहधार वार्ड

हमारे जमीन और मकान का मुआवजा जल्द दिया जाए। हम 18 साल से यहां रह रहे हैं, आज तक धंसाव की स्थिति नहीं आई। अब घर में रहने से भी डर लग रहा है। हमें मुआवजा मिल जाए तो हम स्वयं पुनर्वास कर देंगे। हेमलता, प्रभावित


सरकार को मुआवजा राशि फिक्स कर देनी चाहिए। राहत शिविर में भी अब रहने का मन नहीं कर रहा है। बच्चों के भविष्य को देखते हुए हम सुरक्षित जगह पर बसना चाहते हैं। सरकार यदि जल्द मुआवजा फिक्स नहीं करती है तो लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अंजलि रावत, आपदा प्रभावित
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प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया है कि व्यावसायिक और घरेलु मकानों के मुआवजे में थोड़ा अंतर आएगा। यदि अंतर भी है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। मुआवजा राशि जल्द वितरित कर दी जाए, जिससे लोग अपने घर के सामान के साथ भविष्य की रणनीति बनाएं। मनमोहन सिंह, आपदा प्रभावित


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