नगर में निर्माणाधीन सीवर लाइन का निर्माण कार्य एक बार फिर खटाई में पड़ गया है। ग्रामीणों के बाद अब मामले में भूगर्भ विभाग की ओर से भी मंदिर के सामने सीवर लाइन निर्माण पर आपत्ति जताई है। वहीं विभागीय अधिकारी भूमि की उपलब्धता न होने की बात कहकर लाइन बिछाने के लिए इसी स्थान पर करने की बात पर अड़े हैं।
नगर में बेहतर ड्रेनेज सुविधा के लिए निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई गंगा की ओर से लंबे समय से सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है, लेकिन सीवर लाइन के भारी दबाव वाले मुख्य बाजार के छोर पर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के चिह्नित स्थान भूस्खलन की चपेट में आ गए।
नवल भट्ट और सुनील नेगी का कहना है कि ट्रीटमेंट प्लॉट के बिना सीवर लाइन की उपयोगिता नहीं है। मामले में भूगर्भ विभाग के जूनियर सीए अजय बागड़ी का कहना है कि गोपीनाथ मंदिर भूगर्भ विभाग के संरक्षण में है।
ऐसे में मंदिर के आसपास होने वाले निर्माण के लिए विभाग की अनुमति जरूरी है। ऐसे में विभाग की ओर से मंदिर के ठीक सामने सीवर लाइन का निर्माण नहीं किया जा सकता।
इधर, निर्माण एवं अनुरक्षण गंगा की परियोजना अभियंता अनीशा जाटव का कहना है कि मामले में प्रशासन की मदद ली जा रही है, लेकिन लाइन शिफ्ट करने के लिए भूमि की उपलब्धता न होने के चलते दिक्कतें आ रही हैं।
उन्होंने बताया की प्लांट निर्माण के लिए चिह्नित भूमि सुरक्षित है। वित्तीय स्वीकृत मिलते ही प्लांट का निर्माण शुरू करवा दिया जाएगा।