जल, जंगल और जमीन का संरक्षण पर्यावरण के लिए जरूरी है। साथ ही ग्रामीण आर्थिकी का भी यह मुख्य जरिया है। इनके संरक्षण के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। हम सबको सामूहिक प्रयासों के अलावा भी अपने-अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करने चाहिए। तभी हम इस काम में सफल हो सकेंगे।
यह बातें अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मंडल घाटी के ग्राम पंचायत ग्वाड़ देवलधार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने कही। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्द्धन विषय पर आयोजित गोष्ठी में वन सरपंच कमला देवी ने कहा कि जंगल हमारे प्राकृतिक जल स्रोतों और गाड गदेरों को रीचार्ज रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है, दोनों के लिए जल और जंगल पर्याप्त मात्रा में होने जरूरी हैं। यदि जंगल नहीं रहेंगे तो न खेती हो पाएगी न ही पशुपालन संभव हो पाएगा। जंगल के महत्व को सभी को समझना होगा।
महिला मंगल दल अध्यक्षा संताेषी देवी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जंगल जरूरी हैं तो इंसान के जीवन के लिए भी जंगल उतने ही जरूरी हैं। हमें इस बात को भी देखना होगा कि हमारे जंगलों का दायरा पहले से बढ़ रहा है या कम हो रहा है। यदि कम हो रहा है तो यह हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए, इस दिशा में सामूहिक प्रयास होने चाहिए। आज जिस तरह से जंगल तेजी से घटते जा रहे हैं उसी का नतीजा है कि लोगों को पीने के पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है। प्राकृतिक जलस्रोत सूख रहे हैं। दैवी आपदाएं आ रही हैं। यह सब पर्यावरण असंतुलन का नतीजा है। इस मौके पर सरिता देवी, बसंती देवी, शोभा, पुष्पा रावत, मुन्नी, लीला देवी, दीपा, सरोजनी, शांति, कमला, दीपा बिष्ट, सुमन कुंवर, नंदा देवी आदि मौजूद रहे।