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चंडिका मां की दिवारा यात्रा शुरू

Tue, 11 Apr 2017 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली
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dolli - फोटो : amar ujala bureau
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नंदप्रयाग के सात गांवों की आराध्य देवी मां चंडिका की दिवारा यात्रा धार्मिक परंपराओं के साथ शुरू हुई। मां चंडिका की दिवारा यात्रा नंदप्रयाग से शुरू हुई और पहले दिन रात्रि प्रवास के लिए अपने मायके महड़बगठी पहुंची।
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यात्रा में शामिल होने के लिए प्रवासी ग्रामीण भी अपने घर आए हुए हैं। ध्याणियों ने चंडिका देवी को शृंगार सामग्री भेंटकर परिवार की कुशलता की मनौति मांगी। यात्रा 15 मई से बदरी-केदार की यात्रा पर जाएगी।

मंगलवार सुबह छह बजे से चंडिका मंदिर में पूजा शुरू हो गई। आचार्य ब्राह्मण लक्ष्मी प्रसाद सती ने गणेश और भूम्याल की पूजा की, जबकि ब्रह्म पुजारी बल्लभ प्रसाद सती ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ब्रह्म शक्ति और प्राण प्रतिष्ठा की। सैकड़ों भक्तों ने चंडिका मां के दर्शन कर मनौतियां मांगी। दोपहर एक बजकर बीस मिनट पर मां चंडिका को गर्भगृह से परिसर में लाया गया।
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परिसर में ही ढोल-दमाऊं की थाप पर चंडिका और भूम्याल देवता अपने-अपने पश्वा पर अवतरित हुए और अपने भक्तों को दर्शन देकर यात्रा ने अपराह्न तीन बजे प्रस्थान किया। शाम साढ़े चार बजे मां चंडिका अपने मायके महड़बगठी गांव पहुंची, यहां भक्तों ने मां चंडिका मां का फूल-मालाओं से स्वागत किया। यात्रा समिति के अध्यक्ष जयकृत मनराल ने बताया कि दिवारा यात्रा महड़बगठी, ग्वाई, सकंड, मंगरोली, रामबोरी और सेम गांवों का भ्रमण करेगी।

15 मई से मां चंडिका बदरी-केदार की तीर्थयात्रा पर जाएगी। इस मौके पर प्रधान संगठन के प्रदेश प्रवक्ता तेजवीर कंडेरी, भास्करानंद, शक्तिपाल चौहान, बहादुर सिंह कंडेरी, इंद्रमणि चमोली, सुनील कंडेरी, हुकम सिंह कंडेरी, दिवाकर भट्ट और महेंद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे।

नम आंखों से मां नंदा को कैलाश विदा किया
उर्गम घाटी में एक सप्ताह से चल रहा चोपता कौथिग मां नंदा की कैलाश विदाई के साथ संपन्न हो गया। आराध्य देवी मां नंदा को कैलाश विदा करने के लिए गांव पहुंची ध्याणियों और भक्तों की आंखें झलक उठी। मां नंदा ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया।

घाटी के देवग्राम गांव में सात दिनों से चोपता कौथिग का आयोजन किया जा रहा है। कौथिग के अंतिम दिन शिव-पार्वती विवाह हुआ। आचार्य ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारण के साथ शिव विवाह संपन्न कराया और इसके बाद मां नंदा की डोली को देवग्राम से कैलाश पर्वत के लिए विदा कर दिया। इस दौरान महिलाओं ने झुमेलो नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। चोपता कौथिग समिति के अध्यक्ष राजेंद्र रावत ने बताया कि प्रतिवर्ष अप्रैल माह में चोपता कौथिग का आयोजन किया जाता है। कौथिग को लेकर ग्रामीणों में उत्साह बना रहता है।
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