जलस्रोत सूखने और भूस्खलन जोन सक्रिय होने से चमोली जिले के राजकीय सिंचाई विभाग ने नौ सिंचाई नहरों को निष्प्रोज्य कर दिया है। ये नहरें तीन सालों से बंजर पड़ी हुई थीं। यहां के लिए अब नई सिंचाई नहरों का प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
जिले के दशोली, जोशीमठ और घाट ब्लाकों में अपर अगथला, लोअर अगथला, निजमुला, बुराली-खुनाणा, भेरणी, मोठा, पटूड़ी, डुंगरी और सिरोली सिंचाई नहरें वर्ष 2013 की आपदा और गदेरों में पानी सूख जाने के कारण बंजर पड़ी थीं।
इन नहरों के इर्द-गिर्द भूस्खलन जोन भी सक्रिय था, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था। ग्रामीण खेतों में अन्य गदेरों और बारिश के पानी से सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे थे। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग ने इन नहरों को निष्प्रोज्य घोषित कर दिया है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रमेश कुमार का कहना है कि गांवों के लिए नए सिरे से सिंचाई नहरों का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। चमोली जिले में आपदा के चलते 94 सिंचाई नहरों में से अभी भी 17 नहरें ठप पड़ी हैं। नंदप्रयाग के समीप मासों और मंगरोली सिंचाई नहरों के बंद होने से ग्रामीण खेतों की सिंचाई के लिए परेशान हैं।
ग्रामीण मंगल सिंह, अब्बल सिंह, गजेंद्र सिंह, भूपेंद्र, अनिल, दरवान सिंह, सुनील, भुवनेश्वरी देवी, चेता देवी और पीतांबरी देवी का कहना है कि वर्ष 2016 के जुलाई माह से गांवों की सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हैं। गांवों के समीप से नंदाकिनी नदी बहती है, लेकिन नदी का तल गांवों से नीचे होने के कारण सिंचाई के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं।
सड़कों के निर्माण से भी टूटी नहरें
जिले में निर्माणाधीन सड़कों से भी पांच नहरें सड़कों के निर्माण से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। विभिन्न जगहों पर सड़कों के निर्माण से कांडई, मुन्याली, बनाला, गुनियाला और पाटी सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हैं। विभाग ने लोनिवि से नहरों को सुधारने के लिए 66 लाख की मांग की है, लेकिन अभी तक यह पैसा नहीं मिल पाया है। मुन्याली गांव के ग्रामीणों का कहना है कि नहर टूटी होने से गेहूं की फसल मुरझा गई है।