मेलों व त्योहारों के साथ खेती के कामों को सुगम बनाने के लिए सदियों पुरानी संस्कृति हुड़कीबौल कोठी गांव में देखने को मिल रही है। हुड़कीबौल के तहत हुड़का बजाकर लोकगीत गाए जाते हैं जिसके जरिए काश्तकार अपने ईष्ट व गांव के भूमियाल देवता को याद करते हैं। बुधवार को कोठी गांव में मंडुवे के खेतों में गुड़ाई करने के लिए काश्तकार पहुंचे तो लोकगायक किशन दानू भी मौके पर पहुंचे। किशन दानू ने हुड़कीबौल की शुरुआत पंचनामा देवा हो..., राजूला मालूशाही... आदि गाकर की और महिलाओं ने मंडुवे के खेतों में गुड़ाई की। किशन दानू ने कहा कि हुड़का बजाकर गीत के जरिए बेहतर व सुनहरे भविष्य की कामना की जाती है। इससे सामूहिक रूप से काम करने वालों में उमंग का संचार होता है। हुड़कीबौल उत्तराखंड लोक गायक शैली है। इस दौरान प्रधान पुष्पा देवी, बीडीसी मेंबर सीमा बिष्ट, चंपा देवी, बिमला देवी, दीपा देवी, रेखा देवी, पार्वती, धनुली, भावना, दीप्ति, हेमा देवी आदि शामिल रहे।