अगर प्रतिभा हो तो कोई मुसीबत आड़े नहीं आती। ऐसी ही हैं देवाल की अंकिता। दिव्यांग होने के बावजूद राजकीय कन्या इंटर कालेज देवाल की 10वीं की छात्रा आत्मविश्वास के साथ बोर्ड परीक्षा दे रही हैं। अंकिता पैरों से लिखती हैं और स्कूल की ओर से कई प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर भी प्रतिभाग कर चुकी हैं।
पोलियो के कारण दोनों हाथों से असहाय होने के बावजूद 16 वर्षीय अंकिता ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखने की ढानी। अंकिता इस साल दसवीं के बोर्ड के पेपर दे रही हैं। अंकिता अपने बाएं पैर से लिखती हैं।
वह अंग्रेजी तथा हिंदी लेखन में कई बार पुरस्कृत हो चुकी हैं। पढ़ाई में भी वह हमेशा आगे रहती हैं। कन्या हाईस्कूल की प्रधानाचार्या अनीषा थपलियाल कहती हैं कि अंकिता कक्षा में फर्स्ट आती हैं। पैर से लिखने के बाद भी उसका लेख सबसे सुंदर है।
वर्ष 2014 में उसने राष्ट्रीय बाल कांग्रेस में राज्य स्तर पर प्रतिभाग किया, जिसमें लेखन, भाषण, सांस्कृतिक तथा रचनात्मक गतिविधियों में अंकिता पुरस्कृत हुईं। अंकिता के माता-पिता बेटी की सफलता से उत्साहित हैं। अंकिता के पिता प्रेम सिंह तोपाल यहां आईटीआई में अनुदेशक के पद पर है। बीईओ बीसी मिश्रा ने कहा कि अंकिता अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा है।
मैंने अपनी कमजोरी (दिव्यांगता) को कभी अपने जीवन पर भारी नहीं पड़ने दिया। माता-पिता के साथ अन्य लोग भी मुझे प्रेरित करते हैं जिसे मैं सबसे बड़ी ताकत मानती हूं। - अंकिता।