फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिपं अध्यक्ष के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन

विज्ञापन
गोपेश्वर में जिला पंचायत अयक्ष का पुतला फूंकते भाजपा के कार्यकर्ता ्र - फोटो : GOPESHWAR
विज्ञापन
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी पर नंदादेवी राजजात के कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद भाजपाइयों ने जिला पंचायत अध्यक्ष का पुतला फूंका। कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
विज्ञापन

भाजपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को बस स्टेशन तिराहे पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने पिछले कार्यकाल में नंदादेवी राजजात निर्माण कार्यों की निविदा में गंभीर अनियमितताएं बरतीं। हाल ही में पंचायती राज सचिव ने जिला पंचायत अध्यक्ष को इस मामले में नोटिस भी भेजा है, जिसमें 15 दिन में जवाब मांगा गया है। लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष का कहना है कि उनको यह नोटिस मिला ही नहीं है। भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर बिष्ट ने कहा कि पूर्व में अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने मामले की जांच को दबा दिया था, लेकिन अब यह उजागर हो गया है। इसलिए नैतिकता के आधार पर जिला पंचायत अध्यक्ष को इस्तीफा दे देना चाहिए। प्रदर्शन करने वालों में सुरेंद्र सिंह चौपाल, महेंद्र राणा, नंदन सिंह बिष्ट, दीपक भट्ट, संजय कुमार, ईश्वर सिंह झिंक्वाण, वीरेंद्र सिंह, सुशील डिमरी, देवेंद्र बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य कृष्णा बिष्ट, जिपं सदस्य विनोद नेगी और जिपं सदस्य आशा देवी आदि शामिल थे।
आरोपों को बेबुनियाद बताया
गोपेश्वर। पिछले कार्यकाल के दौरान नंदा राजजात यात्रा के कार्यों में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता के आरोपों में घिरीं जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से वर्ष 2016 की जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी। जांच में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता साबित नहीं हुई थी। मीडिया को जारी बयान में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी चमोली से शासन ने जांच करवाई थी, जिसके आधार पर शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद ही प्रशासक ने निविदा की सबसे कम दरों के हिसाब से भुगतान की स्वीकृति दी थी। जिला पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासन ने सबसे कम दरों पर भुगतान किया, जिससे कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें