किमाणा गांव में उल्टी-दस्त से बच्ची की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने कहा कि शासन-प्रशासन से कई बार सड़क और स्वास्थ्य सुविधा की मांग कर चुके हैं फिर भी यहां मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं।
किमाणा गांव में वर्तमान में करीब 110 परिवार रहते हैं, लेकिन किसी भी सरकार की विकास की किरण उनके गांव तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा से महरूम हैं। मुकेश कोटवाल, आशीष, यशवंत का कहना है कि गांव में सड़क न होने के कारण मरीज को पीठ पर लादकर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाते हैं। कई बार मरीज की रास्ते में ही मौत हो जाती है। अगर कोई रात में बीमार हो जाए तब परेशानी खड़ी हो जाती है। अस्पताल जे जाने के लिए सुबह का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में हेलंग-दुमक मार्ग स्वीकृत हो गया था, लेकिन विभाग और शासन प्रशासन की लापरवाही के कारण सड़क अभी तक नहीं बन पाई है। हालांकि सड़क पर काम चल रहा है, लेकिन 12 साल से सड़क का इंतजार कर रहे हैं।