कांडई पुल-बैरासकुंड सड़क के सौ मीटर दायरे में रुक रुककर भूस्खलन हो रहा है जिससे बैरासकुंड मंदिर के साथ ही क्षेत्र के 12 से अधिक गांवों को यातायात से जोड़ने वाली यह सड़क बदहाल हो गई है। हकीकत यह है कि सड़क पर वर्ष 2013 में आपदा के दौरान आया मलबा भी अभी तक नहीं उठाया गया है। ऐसे में लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात में यहां समस्या और बढ़ जाएगी।
बैरासकुंड मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। श्रद्धालु कांडई पुल-बैरासकुंड (15 किमी) सड़क से ही आवाजाही करते हैं। साथ ही क्षेत्र के ग्राम पंचायत मटई, सेमा, मोठा, खल्तरा, ग्वाड़, हितमोली गांव के ग्रामीण भी इसी मार्ग से अपने गंतव्य को पहुंचते हैं। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य भास्करानंद पुरोहित और लीलानंद पुरोहित का कहना है कि सड़क से डामर उखड़ गया है। ग्रामीणों को इस सड़क से वाहनों में हिचकोले खाकर गंतव्य को जाना पड़ रहा है। इधर, पीएमजीएसवाई के ईई पीआर चमोली का कहना है कि चमला तोक में सड़क के भूस्खलन क्षेत्र का ट्रीटमेंट किया गया है लेकिन यहां भूस्खलन रुक नहीं रहा है। इससे दिक्कतें आ रही हैं। यहां सड़क की हिल कटिंग भी की गई है। सड़क पर जहां डामर उखड़ गया है, वहां डामरीकरण कार्य किया जाएगा।