कई दिनों से बारिश और बर्फबारी न होने से तापमान बढ़ने लगा है और ऊंचाई वाले इलाकों में जमी बर्फ पिघलने लगी है। बदरीनाथ धाम में अभी मात्र दो फीट बची है जबकि पिछले साल इस समय तक यहां पांच से छह फीट बर्फ थी।
जनवरी माह में हुई बर्फबारी के बाद जहां बदरीनाथ धाम में बीते दिनों करीब आठ फीट बर्फ जम गई थी, वहीं एक सप्ताह से बढ़ रहे तापमान के चलते अब यहां पहाड़ियाें पर जमी बर्फ पिघलने लगी है। ऐसे में इस वर्ष भी तीर्थयात्रियों को बदरीनाथ धाम में बर्फ के दर्शन कम ही होंगे जबकि पिछले वर्ष यहां पांच से छह फीट बर्फ जमी हुई थी।
बदरीनाथ धाम के कपाट छह मई को खुलेंगे, तब तक बदरीनाथ और देश के अंतिम गांव माणा में नाममात्र की बर्फ रहेगी। बदरीनाथ हाईवे पर हनुमान चट्टी से देव दर्शनी तक मात्र दो ग्लेशियर जमे हैं। दूध गंगा में करीब दो सौ मीटर की दूरी से ग्लेशियर बदरीनाथ हाईवे तक पसरा हुआ है। बदरीनाथ धाम परिसर में अभी दो फीट बर्फ जमी हुई है।
बदरीनाथ के पीछे नर और नारायण पर्वत पर भी बर्फ कम जमीं है। पनार बुग्याल, रुद्रनाथ, औली में बर्फ पिघल चुकी है। बर्फ न होने के कारण औली में प्रस्तावित राष्ट्रीय जूनियर स्कीइंग चैंपियनशिप स्थगित कर दी गई है।