ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों किलोमीटर सड़कें बनवाकर खंडूड़ी उस वक्त भारत के रोडमैन कहलाए जाने लगे। यही वह दौर भी था जब तंग और एक सदी पुराने मापदंडों के आधार पर बने राष्ट्रीय राजमार्गों को भी आधुनिक किया जा रहा था। चारों महानगरों को जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना गोल्डन चतुर्भुज आकार ले रही थी।
कैबिनेट मंत्री बनते ही उन्होंने इस योजना का काम तेजी से पूरा कराया। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के तहत भारत भी अब उन चुनिंदा देशों में शामिल होने की दहलीज पर खड़ा था जहां पर मल्टीलेन रोड नेटवर्क बने थे। चार और छह लेन की ये सड़कें बीसी खंडूड़ी के कैबिनेट मंत्री रहते ही तेजी से बन पाईं। हाइवे प्रोजेक्ट को तेजी से चलाने पर ही उन्हें हाइवे प्रोजेक्ट का फेस भी कहा जाने लगा।
प्रशासनिक समझ और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से बनाई जगह
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि.) ने सेना में इंजीनियरिंग कोर में सेवाएं दी थीं। उनके पास प्रशासनिक अनुभव तो था लेकिन राजनीतिक अनुभव शायद उतना नहीं था कि उन्हें सीधे कोई मंत्रालय दिया जाता। शायद यही कारण रहा कि अटल सरकार में वर्ष 2000 से 2003 तक सड़क परिवहन राज्य मंत्री रहे। इसके बाद उनकी प्रशासनिक क्षमताओं और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के चलते जो उन्होंने मंत्रालय में राज्यमंत्री रहते काम किया उसी का परिणाम रहा कि वर्ष 2003 में इसी मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बना दिया गया।