उनकी इस लगन को देखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2011-12 का तीलू रौतेली पुरस्कार देकर उन्हें सम्मानित भी किया। इसके अलावा कमला को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया जा चुका है।
49 वर्षीय कमला राणा का बाल विवाह हुआ था। शादी के आठ माह बाद ही पति की मौत होने से 15 साल की छोटी उम्र में ही वह बाल विधवा हो गई। लेकिन कमला ने हार नहीं मानी।
पहले खेती-बाड़ी कर परिवार का लालन पालन किया और उसके बाद सिलाई की दुकान चलाकर आत्मनिर्भर बनी। आशा कार्यकत्री बनने से पूर्व कमला विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाआें से भी जुड़ी हुई थी। जिनके माध्यम से उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए वृहद कार्य किए।
आशा कार्यकत्री बनने के बाद कमला ने ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाआें व शिश़ुआें के स्वास्थ्य के दिशा में सराहनीय कार्य किए। जिसे देखते हुए उन्हें वर्ष 2012 में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर जयपुर (राजस्थान) में सम्मानित किया गया।
उनके संघर्षों व उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया। कमला के संघर्ष का ही नतीजा है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होने लगी है।