अमृत गंगा पेयजल योजना से दूषित पानी की आपूर्ति होने से नगर में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। कई इलाकों में लोग दूषित पानी ही पीने को मजबूर हैं जबकि कई हिस्सों में प्राकृतिक स्रोतों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
चमोली नगर पालिका क्षेत्र की आबादी करीब तीस हजार है। नगरवासियों की प्यास बुझाने के लिए जल निगम ने मंडल घाटी से गोपेश्वर के लिए करीब छह करोड़ रुपये की लागत से अमृत गंगा पेयजल योजना का निर्माण किया था, लेकिन योजना के स्रोत पर फिल्टर की व्यवस्था नहीं होने से बरसात में योजना का पानी दूषित हो गया है।
इस वजह से हल्द्वापानी, नर-नारायण कॉलोनी, इंदिरा मार्केट, जल निगम कालोनी, सुभाष नगर, नैग्वाड़ और पुलिस लाइन क्षेत्र में करीब पंद्रह हजार की आबादी दो दिनों से पानी के लिए भटक रही है। मंदिर मार्ग, पूल्ड हाउस, मुर्गी फार्म, कलेक्ट्रेट कॉलोनी और लोनिवि कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति हो रही है, लेकिन मिट्टी युक्त और कूड़ा युक्त पानी सप्लाई हो रहा है। पास में कोई प्राकृतिक जलस्रोत नहीं होने से लोग इसी दूषित पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत का कहना है कि जल संस्थान की ओर से करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को दूषित पानी पिलाया जा रहा है। चक्रधर तिवारी पर्यावरण ट्रस्ट के तहत संचालित होने वाले संकल्प अभियान के संयोजक मनोज तिवारी का कहना है कि नगर में अमृत गंगा पेयजल लाइन से वितरण की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इधर, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता जेपी जोशी का कहना है कि मंडल घाटी में अमृत गंगा पर जल्द ही फिल्टर टैंक बनकर तैयार हो जाएगा।