चमोली जिले में पोखरी और घिंघराण क्षेत्र में पेयजल के लिए हा-हाकार मचा है। ग्रामीणों के सामने मवेशियों के लिए पेयजल उपलब्ध कराना मुश्किल बना है। पोखरी क्षेत्र में गाड़-गदेरों में पानी सूख गया है, जिससे स्थिति और भी विकट बनी है। ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोतों पर घंटों इंतजार करने के बाद एक बाल्टी पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।
घिंघराण क्षेत्र के देवर-खडोरा गांव में ग्रामीण गांव से करीब एक किलोमीटर दूर प्राकृतिक स्रोत से पेयजल आपूर्ति कर रहे हैं। गांव में जल संस्थान की पेयजल लाइन है लेकिन पानी के टैंक में पानी की मात्रा कम होने से पानी के साथ कीड़ी-मकोड़े भी आ रहे हैं। क्षेत्र में पानी की अन्यत्र व्यवस्था न होने से ग्रामीण इसी गंदे पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।
स्थानीय निवासी तेजपाल, हरीश, दिनेश मुकेश रावत, सुरेंद्र, पंकज, महेंद्र और मनमोहन का कहना है कि देवर-खडोरा में 90 परिवार रह रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल संस्थान ग्रामीणों से सिर्फ बिल वसूल रहा है, और पेयजल लाइन का रख-रखाव ठीक ढंग से नहीं कर रहा है।
पोखरी मुख्य बाजार के साथ ही समीपवर्ती गांवों में भी पीने के पानी के लिए ग्रामीण भटक रहे हैं। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता जेपी जोशी का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पानी की कमी बनी है, वहां टैंकरों से आपूर्ति सुचारु की जाएगी। देवर-खडोरा क्षेत्र में भी शीघ्र टैंकर से पेयजल आपूर्ति की जाएगी।