प्रकृति प्रेम और गढ़वाली संस्कृति से सराबोर कविता संग्रह ‘आशा की पहली किरन’ का एडीएम अनिल कुमार चन्याल ने विमोचन किया। एडीएम ने कहा कि परिश्रम सफलता की कुंजी है और सफलता पाने के लिए जीवन में मेहनती होना अति आवश्यक है।
‘आशा की पहली किरन’ पुस्तक की रचयिता बरसाली गांव की किरन पुरोहित ने बताया कि उनके कविता संग्रह में प्रकृति प्रेम, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, गढ़वाली संस्कृति और राष्ट्रवाद से संबंधित 64 कविताएं हैं। किरन गढ़वाल विवि में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। किरन ने बताया कि उनको कविताएं लिखने का शौक बचपन से है। आठवीं में पढ़ने के दौरान उन्होंने गढ़वाल की संस्कृति पर लेखन कार्य शुरू किया था। पढ़ाई के साथ कविताएं लिखती गईं, जो वर्तमान में किताब के रूप में संग्रहित की गई हैं। किरन को काव्य शिरोमणि गोपाल दास नीरज स्मृति सम्मान, हिंदी साहित्य रत्न सम्मान 2019, शाश्वत श्रृंगारिक सम्मान, स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति सम्मान, अनुभव साहित्य सम्मान, सृजन साहित्य मंच की ओर से सृजन मित्र सम्मान, साहित्य गौरव आदि सम्मान से नवाजा जा चुका है।