आदिबदरी नाथ मंदिर के कपाट खुलने पर फूलों से सजाया गया मंदिर।
मकर संक्रांति पर आदिबदरी नाथ मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान आदिबदरीनाथ के शृंगार दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। एक श्रद्धालु ने मंदिर को एक किलो चांदी का छत्र भी अर्पित किया।
एक (पौष) माह तक आदिबदरी मंदिर के कपाट बंद रहे। शनिवार को ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के मुख्य पुजारी चक्रधर थपलियाल ने सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोलकर गर्भ गृह में प्रवेश किया। इसके बाद भगवान आदिबदरी नाथ को तांबे के कलश में लाए गए सप्तसिंधु के जल से स्नान कराया गया। पीत वस्त्रों के साथ क्रीट मुकुट और कुमकुम रौली के बाद पंच ज्वाला आरती की गई।
श्रद्धालुओं ने भगवान आदिबदरीनाथ के शृंगार दर्शन किए। मंदिर में बने कड़ाह भोग को भक्तों ने भगवान को अर्पित किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी ने बताया कि इस दौरान एक श्रद्धालु ने एक किलो चांदी का छत्र भगवान आदिबदरीनाथ को चढ़ाया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वीकेजे कंस्ट्रक्शंस कंपनी के प्रबंधक नरेंद्र लखचौरा, मंदिर समिति के महासचिव गैणा सिंह, नरेश बरमोला, नवीन बहुगुणा, जयदीप शाह, राजेंद्र चमोला और बलवंत नेगी आदि मौजूद थे।
श्रीमद् देवी भागवत कथा शुरू
आदिबदरी मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही मंदिर परिसर में बने गढ़वाल राइफल कीर्तन मंडप में नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन व्यास आचार्य विजय खंडूड़ी ने कहा कि देवी भागवत पुराण सुनने से मानव संसार में शक्ति और रिद्धि, सिद्घि का अर्जन करता है।