पंच बदरियों में शामिल आदिबदरी धाम के कपाट शुक्रवार को पौराणिक परंपराओं के साथ ब्रह्म मुहूर्त में सुबह साढ़े चार बजे खुले। इस दौरान मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया। दर्शनों के लिए सुबह से दोपहर तक श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रही।
मकर संक्रांति के अवसर पर सुबह साढ़े चार बजे मुख्य पुजारी चक्रधर थपलियाल ने मंदिर के कपाट खोलकर गर्भ गृह में प्रवेश किया। इस दौरान सप्त सिंधु जल से भगवान आदिबदरी नाथ की प्रतिमा का स्नान और महाभिषेक किया गया।
आदिबदरीनाथ का पीतांबर वस्त्रों और आभूषणों से श्रृंगार किया गया, जिसके बाद भगवान को चौलाई के लड्डू और प्रसाद का भोग लगाया गया। पंच ज्वाला आरती उतारने के बाद श्रद्धालुओं को भगवान आदिबदरी के दर्शन कराए गए। आदिबदरी नाथ मंदिर के कपाट वर्ष भर में केवल पौष माह (एक माह) के लिए बंद रहते हैं।
मंदिर में आयोजित कार्यक्रमों का संचालन नवीन बहुगुणा, गैणा सिंह, समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी, नरेंद्र सिंह चाकर, नरेश बरमोला, भुवन बरमोला, विजय चमोला, धर्म सिंह, विनोद नेगी, धनवंतरी प्रसाद खंडूड़ी, राजेंद्र चमोला आदि ने किया।
स्पीकर, डिप्टी स्पीकर भी पहुंचे
विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुजवाल और डिप्टी स्पीकर डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी दोपहर करीब पौने बारह बजे मंदिर पहुंचे। इस दौरान यहां दोनों नेताओं ने पूजा की। इस दौरान गढ़वाल राइफल कीर्तन मंडप में श्रीमद्भागवत कथा शुरू हुई।
कथा व्यास साध्वी विचित्र रचना को स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने उत्तरी वस्त्र ओढ़ाकर व्यास गद्दी पर बिठाया। क्षेत्र के स्व. कर्नल वीपी नवानी के बेटे अभिषेक नवानी और परिजनों ने कथा में बैठे वेदपाठियों को वरणी वस्त्र ओढ़ाए।