कर्णप्रयाग। केदारनाथ वन प्रभाग के चार रेंजों के विकास कार्यों का ब्लू प्रिंट जल्द तैयार होगा। वन विभाग की ओर से इसके लिए डीएफओ कार्ययोजना सहित स्टाफ की तैनाती कर तहसील मुख्यालय पर इसका कार्यालय शुरू कर दिया है। डीएफओ की मानें तो प्लान में जंगलों से सटे गांवों में हो रहे जंगली जानवरों से नुकसान को कम करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही पौधरोपण भी होगा। दस सालों के लिए प्लान दो वर्ष में बन जाएगा।
वनप्रभाग में अब तक हुई विभिन्न गतिविधियों का अध्ययन किया जाएगा। योजना के अनुसार रिजर्व फारेस्ट से सटे गांवों में बंदर, सूअर और भालू सहित अन्य जंगली जानवरों के आने की शिकायतें अक्सर आती हैं, जिसके लिए योजना तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ पंकज कुमार ने बताया कि वन्य जीव और वन पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत स्तंभ हैं ऐसे में वनों और वन्य जीवों के बदलते हुए वातावरण में संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन महत्वपूर्ण होता है, जिसके लिए भी योजनाएं तैयार होंगी। दस साल तक पौधरोपण भी होता रहेगा।
इन रेंजों के लिए बनेगा प्लान
केदारनाथ वन प्रभाग के धनपुर, नागनाथ और लोहवा रेंज के लिए विकास योजनाएं तैयार होंगी। रेंजर कार्ययोजना प्रदीप गौड़ की मानें तो गोपेश्वर रेंज का आधा हिस्सा नंदादेवी बायोस्फेयर में शामिल है। इसके लिए गोपेश्वर रेंज का आधा हिस्सा ही इस योजना में शामिल होगा।
उधार के कर्मी, उधार के दफ्तर
भले ही दो वर्ष के तैयार प्लान पर एक वनप्रभाग के 10 वर्षों का विकास निर्भर करता हो, लेकिन इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए गठित विभागीय सेक्शन के पास सभी उधार के कर्मचारी हैं तो कार्यालय भी उधार का है। कर्णप्रयाग में शुरू हुआ डीएफओ कार्ययोजना का दफ्तर दस वर्ष पहले यहां रुद्र्रप्रयाग शिफ्ट हो चुके उपरिगंगा वन प्रभाग के विश्राम गृह पर चल रहा है। डीएफओ की मानें तो विभिन्न रेंजों से रेंजर को प्रोजेक्ट के लिए प्रतिनियुक्ति पर लिया है, जबकि दफ्तर संचालित करने के लिए सभी व्यवस्थाएं भी खुद करनी होती हैं।