थराली/नारायणबगड़/देवाल। नारायणबगड़ में शतायु झूला पुल के दोनों पिल्लर धराशाही हो गए हैं। वहीं थराली बाजार को तहसील प्रशासन ने खाली करा दिया है। यहां लगभग चालीस दुकानें पिंडर नदी की जद में आ गई हैं, जबकि अभी तक आठ आवासीय भवन, मस्जिद मार्केट में तीन आवासीय भवन और दस दुकानें नदी में बह गई है। राड़ीबगड़ से थराली बाजार तक एक किमी मोटर मार्ग सड़क ध्वस्त हो गई है, जबकि मुख्य बाजार से पेट्रोल पंप तक भी करीब पांच सौ मीटर सड़क ध्वस्त हो गई है।
थराली के चेपड़ों झूला पुल, डंपर, प्राथमिक विद्यालय चेपडों, दो आवसीय मकान और कई बिजली के पोल नदी में बह गए हैं। रविवार रात्रि को मुस्लिम बस्ती में तीन आवासीय मकान, तीन दुकानें नदी में समा गई हैं। मुख्य बाजार से तहसील तक थराली-देवाल-मुंदोली मोटर मार्ग का दो सौ मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया है।
उधर, नारायणबगड़ के दिनेश कुमार पाल, महावीर सिंह नेगी, दलवीर सिंह नेगी, मनवर सिंह नेगी की दुकानें और दरवेश गारमेंट के तीन गोदाम नदी में समा गए हैं। डा. केसी पांडे, बिजेंद्र सिंह रावत, धीरेंद्र सिंह रावत के आवासीय मकान भी ध्वस्त हो गए हैं। जबकि ज्ञान सिंह मेहरा, गंगा सिंह रावत, दिनेश नेगी, देवेंद्र कनेरी, उत्तरांचल विद्या निकेतन, हुकुम सिंह बिष्ट, सबर सिंह पंवार, धनीराम कांडपाल, महेशानंद तिवारी रणजीत रावत, ओमप्रकाश पाल, दरवान सिंह बिष्ट के आवासीय मकानों को खतरा बना हुआ है। ब्लाक मुख्यालय के पल्ला सेरा और तल्ला सेरा गांवों में पिंडर नदी का पानी घुस रहा है। वहीं मुख्य बाजार में कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटर मार्ग का करीब पांच सौ मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया है।
इंसेट
विद्युत परियोजना भी डूबी
देवाल। कैल नदी पर स्थित पांच मेगावाट की चमोली हाईड्रो विद्युत परियोजना कैल नदी में डूब गई। नदी किनारे के घरों में रहने वाले लोग अपने सगे-संबंधियों के यहां शरण लिए हुए हैं। नंदकेशरी में श्रीनंदा राजजात के लिए बना प्रतीक्षालय भी ध्वस्त हो गया है।
विद्युत-संचार सेवाएं ठप
पिंडरघाटी के नारायणबगड़, थराली और देवाल में लगातार बारिश के चलते विद्युत और संचार सेवा भी तीन दिन से ठप पड़ी है। समस्या के कारण लोगों का किसी से संपर्क नहीं हो पाया है।
गोशाला ध्वस्त, भैस मरी
कर्णप्रयाग। भारी बारिश के चलते ग्वालदम में एक गोशाला टूटने से उसमें बंधी दुधारु भैस की मौत हो गई। स्थानीय निवासी हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि सोमवार को ग्वालदम गांव निवासी बलवीर सिंह की गडिया की गोशाला के भूस्खलन के चपेट में आने से उसमें बंधी एक भैंस की मौत हो गई।