देवाल। वित्तीय वर्ष 2018-19 में मनरेगा के अंतर्गत 6012 पंजीकृत परिवारों में से 409 परिवारों को ही सौ दिन का रोजगार मिल पाया है। वहीं मनरेगा के तहत मैटीरियल अंश का ढाई करोड़ रुपये का भुगतान भी रुका हुआ है।
मनरेगा के अंतर्गत गांवों में कई प्रकार की योजनाएं बनाई जा रही हैं। मनरेगा से मिलने वाली धनराशि को रास्तों की मरम्मत, खेेती आदि पर खर्च किया जाता है। रोजगारपरक योजना होने के बावजूद 10 प्रतिशत परिवारों को भी सौ दिन का रोजगार नहीं मिलता है। देवाल ब्लाक में 6012 पंजीकृत परिवार हैं, लेकिन 409 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका। 1073 योजनाओं पर नौ करोड़ खर्च हुआ है जबकि मैटीरियल अंश का लगभग ढाई करोड़ रुपये का भुगतान रुका है। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के एक महीने बाद भी नई कार्ययोजना पर काम शुरू नहीं हुए। वित्तीय साल 2017-18 में 358 परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला था। प्रधान संघ के अध्यक्ष पुष्कर फर्स्वाण और महामंत्री हीरा राम ने कहा कि मनरेगा कार्यों में हीलाहवाली या देरी होने से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास नहीं हो पाता है। बीडीओ एमपी भट्ट का कहना है कि इस साल की कार्ययोजना बना ली गई है। जल्दी काम शुरू किया जाएगा। रुके हुए भुगतान के बारे में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। एक माह में मैटीरियल अंश का भुगतान होने की उम्मीद है।