दशोली ब्लॉक के 38 गांवों को यातायात से जोड़ने वाली 23.9 किमी चमोली-सरतोली सड़क कई जगहों पर जानलेवा बनी हुई है। उक्त सड़क का निर्माण कार्य तीन फेज में हुआ, जिससे एडीबी, लोनिवि और पीएमजीएसवाई विभाग सड़क के संरक्षण का जिम्मा संभाले हुए है। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से आज भी सड़क वाहनों के चलने लायक नहीं है। कई जगहों पर सवारियां वाहन से उतरकर पैदल चलने में अपनी भलाई समझते हैं।
वर्ष 1997 में चमोली-सरतोली सड़क का निर्माण कार्य हुआ। शुरुआत में सड़क का निर्माण लस्यारी गांव तक नौ किमी हुआ। अन्य गांव के लोगों की मांग पर वर्ष 2008 में लस्यारी से सरतोली तक सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसमें से सवा किमी लोनिवि और 13.9 किमी सड़क निर्माण कार्य पीएमजीएसवाई को सौंपा गया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भी सड़क पर हिल कटिंग के अलावा कोई कार्य नहीं हुआ है।
वहीं जिला पंचायत सदस्य ऊषा रावत, क्षेत्र पंचायत सदस्य आनंद सिंह और पूर्व सैनिक गंभीर सिंह का कहना है कि मजोठी गांव से आगे सड़क जानलेवा बनी हुई है। यहां गदेरे पर निर्मित मोटर पुल को बने छह माह का समय हो गया है, लेकिन एप्रोच न होनेे से अभी तक भी वाहनों की आवाजाही गदेरे से कराई जा रही है। ऐसे में सरतोली की ओर जाने वाले वाहनों को तीखी ढलान पर आवाजाही करनी पड़ रही है, जिससे दुर्घटना की संभावना बनी हुई है।