चमोली जिले में 38 प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं। पर्यावरणविद् की मानें तो बारिश न होने से पेयजल स्रोत सूख रहे हैं वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों के निर्माण के चलते स्रोतों के सूखने की बात कह रहे हैं।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेलंग गांव और जोशीमठ के बीच स्थित जोगीधारा प्राकृतिक झरना इस वर्ष सूख गया है। उर्गम घाटी में सदाबहार बहने वाला पंचधारा स्रोत के चार धारे भी सूख गए हैं। यहां अब एकमात्र पंचधारा लोगों की प्यास बुझा रहा है।
यही स्थिति जोशीमठ के ढाक गांव के पेयजल स्रोत की है। हेलंग के समीप पल्ला गांव में पेयजल स्रोत पर पानी की मात्रा कम होने से ग्रामीण स्रोत से पानी भरने के लिए रतजगा कर रहे हैं। जोशीमठ ब्लॉक के प्रधान संगठन अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी और पल्ला गांव के प्रधान मनबर सिंह का कहना है कि पल्ला गांव के ठीक नीचे पीपलकोटी-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना की भूमिगत सुरंग और ढाक गांव के नीचे तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की सुरंग बन रही है, जिससे पेयजल स्रोत भूमिगत होने के साथ ही सूख रहे हैं।
इसके साथ ही अन्य स्रोत सूख चुके हैं। पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ नहीं जमी है, जिससे पेयजल स्रोतों पर पानी की मात्रा में कमी आ रही है।
वहीं हाइड्रो ज्यूलोजिकल सर्वेयर देहरादून के डा. दिनेश सती ने कहा कि परियोजना सुरंगों से पेयजल स्रोतों पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है। जहां पेयजल स्रोत सूख रहे हैं हो सकता है वहां पेड़-पौधों की मात्रा कम हो और बारिश की कमी के चलते स्रोत सूख रहे होंगे।