गोपेश्वर। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सोमवार से स्कूल-कॉलेज खुल गए हैं। छात्राओं में स्कूल जाने के लिए उत्साह देखने को मिला, लेकिन अवकाश के दौरान हुए शिक्षकों के तबादले के बाद भी स्कूल में प्रतिस्थानी नहीं पहुंचे। ऐसे में छात्राएं पढ़ाई के खेलती रहीं और छुट्टी के बाद घरों को लौट गईं।
जीजीआईसी गोपेश्वर में 300 छात्राएं हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान यहां से तीन प्रवक्ता और तीन एलटी शिक्षिकाओं का तबादला कर दिया गया, लेकिन अभी तक यहां प्रतिस्थानी शिक्षिकाओं की तैनाती नहीं की गई है। विद्यालय से राजनीति विज्ञान, हिंदी और इतिहास की प्रवक्ता तथा गणित, अंग्रेजी व सामाजिक विज्ञान में एलटी शिक्षिकाओं का स्थानांतरण किया गया है। शिक्षक-अभिभावक संघ की अध्यक्ष दीपा तिवारी, सचिव मीनाक्षी देवी, कोषाध्यक्ष हुकुम सिंह, मीना तिवारी, गोदांबरी, शशी और अरुणा देवी ने कहा कि अगर जल्द यहां प्रतिस्थानी नहीं भेजे तो पठन-पाठन व्यवस्था चरमरा जाएगी। उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी से शीघ्र विद्यालय में प्रतिस्थानी भेजने या शिक्षिकाओं की तैनाती की मांग उठाई। प्रधानाचार्य ममता शाह ने कहा कि सीमित शिक्षिकाओं से ही शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। इधर, मुख्य शिक्षा अधिकारी ललित मोहन चमोला ने कहा कि अनिवार्य स्थानांतरण के कारण स्थानांतरण हुआ है। जल्द ही जीजीआईसी में शिक्षिकाओं की तैनाती कर ली जाएगी।
एक ही स्कूल में भेजे भौतिक विज्ञान के दो शिक्षक
शिक्षा विभाग का कारनामा, मानकों को ताक पर हुए शिक्षकों के तबादले
अमर उजाला ब्यूरो
कर्णप्रयाग। हाल ही में शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी किए गए आदेश में मानकों को ताक पर रखकर शिक्षकों के तबादले किए हैं। स्थिति यह है कि एक ही स्कूल में भौतिक विज्ञान के दो शिक्षकों को भेज दिया गया है जबकि देवाल ब्लॉक में एक भी शिक्षक नहीं भेजा गया है।
राइंका जोशीमठ में प्रवक्ता पद पर रिक्त के सापेक्ष भौतिक विज्ञान के दो शिक्षकों को भेज दिया गया है। अरुण कुमार कैंथोला को राइंका भगवानपुर धारकोट (देहरादून) से और वीरेंद्र कुमार सिंह को राइंका बूरा (चमोली) से राइंका जोशीमठ में भेजा गया है। ऐसे में दोनों शिक्षकों के सामने राइंका जोशीमठ में चार्ज लेने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासी पुष्कर रावत, राजेंद्र सगोई आदि का कहना है कि शिक्षा विभाग की भी अजीब कारनामा है। चमोली जिले के राइंका सिमली, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, देवाल, नैणी, नंदासैंण, कोटी, आदिबदरी समेत कई स्कूलों में सालों से एलटी और प्रवक्ता के पद रिक्त पड़े हैं। यहां एक भी शिक्षक नहीं है जबकि राइंका जोशीमठ में एक ही विषय के दो शिक्षक भेज दिए गए हैं।