देवाल। ब्लॉक के सूया गांव में आयोजित रामलीला मंचन के छठवें दिन श्री राम वनवास का मंचन देखकर श्रद्धालु भावुक हो गए। रामलीला में महाराजा दशरथ राम को अयोध्या का राज सिंहासन सौंपने का निर्णय लेते हैं, तो दासी मंथरा महारानी कैकेयी को यह सब बताती है। मंथरा कहती है कि राम के राजा बनने से उनके पुत्र भरत को सेवक की तरह कार्य करना पड़ेगा। महारानी दासी की बातों में आकर कोप भवन में चली जाती है। जब राजा दशरथ कैकेयी से उनके कोपभवन में जाने का कारण पूछते हैं तो महारानी राजा से दो वरदान मांगती है। वह राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को अयोध्या का राजा बनाने की बात कहती हैं। यह सुनकर महाराजा दशरथ व्यथित होकर भूमि पर गिर जाते हैं। इसके बाद राम सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास पर चले जाते हैं। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष खड़क सिंह बिष्ट, भुवन बिष्ट, बलवंत सिंह, चंद्र सिंह, योगबंर सिंह, जगत सिंह, यशोदा देवी आदि मौजूद थे।