गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम सहित यात्रा पड़ावों पर सीवर की उचित व्यवस्था न होने से शहर की गंदगी खुलेआम अलकनंदा में प्रवाहित की जा रही है। जोशीमठ और कर्णप्रयाग में भी यही स्थिति है। कई जगह सीवरेज प्लांट हैं, लेकिन यह कई जगहों पर क्षतिग्रस्त पड़े हैं। अलकनंदा और पिंडर नदियां दूषित हो रही हैं और प्रशासन नदी में सीवरेज प्रवाहित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी तक सिमटा हुआ है। अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
बदरीनाथ की आबादी पांच हजार, जोशीमठ की 20 हजार और कर्णप्रयाग की 18 हजार है। यात्रा के दौरान यह आंकड़ा बढ़ जाता है और अलकनंदा और पिंडर नदियां अधिक दूषित होने लगती हैं। बदरीनाथ धाम में वामणी गांव को जाने वाले पुल के समीप नगर का सीवर अलकनंदा में बह रहा है। हालांकि यहां नदी किनारे सीवरेज प्लांट निर्मित हैं, लेकिन यह लीकेज होने से नदी दूषित हो रही है। व्यापार सभा अध्यक्ष विनोद नवानी ने कहा कि सीवरेज प्लांट करीब दो सालों से लीकेज हो रहा है, लेकिन संबंधित विभाग इसकी मरम्मत नहीं कर रहा है, जबकि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों सहित प्रशासन से कई बार शिकायत की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि धाम में होटल, धर्मशालाओं का सीवर सीधे अलकनंदा में जा रहा है और प्रशासन आंख मूूंद कर बैठा है। जोशीमठ शहर में भी सीवर लाइन कई स्थानों पर लीकेज है और सिंहधार गदेरे में सीवर जा रहा है। यह गदेरा अलकनंदा में मिलता है।
नदियों को साफ रखने की कवायद फेल
कर्णप्रयाग। अलकनंदा और पिंडर नदियों को स्वच्छ रखने की कवायद दम तोड़ रही है। कर्णप्रयाग नगर में आठ बड़े नालों की गंदगी सीधे नदियों में जा रही है। हालांकि नगर में मिशन क्लीन गंगा प्रोजेक्ट के तहत प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन प्लांट में जाने वाले सीवर के लिए अभी तक पूरे पाइप नहीं बिछाए गए हैं। करीब पांच सौ से अधिक घरों से हजारों लीटर दूषित पानी और कचरा रोजाना सीधे अलकनंदा और पिंडर नदियों में जा रहा है। नगर में गंदे नालों को नदियों में गिरने से रोकने के लिए सरकार ने सुभाषनगर, कर्ण मंदिर परिसर, मुख्य बाजार, गांधीनगर और संगम तट पर सीवर प्लांट बनाने के लिए उत्तराखंड पेयजल निगम को जिम्मा दिया। विभाग को सीवर लाइन के करीब 650 मीटर पाइप बिछाकर अप्रैल महीने तक कार्य पूूूरा करना था, लेकिन कार्यदायी संस्था की लापरवाही से काम अधर में लटका है। कार्य पूरा नहीं होने पर पुष्कर रावत, हरीश, पंकज, वीरेंद्र, सुभाष और दिनेश आदि ने नाराजगी जताई। पेयजल निगम चमोली के अवर अभियंता दीपक कुमार वत्स का कहना है कि 5.42 करोड़ रुपये की इस योजना पर 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। ठेकेदार को जुलाई महीने तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कार्य पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जाएगा।
कोट
सीवर नदियों में प्रवाहित किए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगी। पूर्व में इस संबंध में सख्त हिदायत दी गई है। सीवर नदी में प्रवाहित होने पर संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। - स्वाति एस भदौरिया, जिलाधिकारी चमोली।