पीपलकोटी। निजमूला घाटी के ग्राम पंचायत गाड़ी में पानी की समस्या बनी है। गांव में कोई प्राकृतिक पेयजल स्रोत न होने से गांव के दो सौ परिवार बिरही नदी से पीने के पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। ग्राम पंचायत के धार, आगरा, तोली और चौखी तोक में भी पेयजल किल्लत बनी है। ग्रामीणों को स्वयं और अपने मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल बना है।
ग्रामीण अब्बल सिंह, विक्रम सिंह, प्रकाश सिंह और हरेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में सप्लाई हो रही पेयजल योजना पर पानी की मात्रा कम हो गई है। जल संस्थान के अधिकारियों से कई बार गांव में नई पेयजल लाइन बिछाने की मांग की गई लेकिन इस ओर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इधर जल संस्थान के सहायक अभियंता अरुण गुप्ता का कहना है कि पेयजल स्रोत पर पानी कम होने के कारण पेयजल लाइन पर जलापूर्ति कम हो रही है। क्षेत्र में स्थित अन्य पेयजल स्रोत और पेयजल लाइन से जगह-जगह हो रहे लीकेज को ठीक कर गांव में पानी की समुचित व्यवस्था करवाई जाएगी।
टनल निर्माण के लिए विस्फोट से सूखे पेयजल स्रोत
हाट गांव के ग्रामीणों ने लगाया आरोप, पानी को तरस रहे ग्रामीण
पीपलकोटी। ग्राम पंचायत हाट के ग्रामीण पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। गांव के दो प्राकृतिक पेयजल स्रोत सूख गए हैं, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव के समीप ही निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टनल निर्माण में हो रहे अत्यधिक विस्फोटों से प्राकृतिक पेयजल स्रोत सूख गए हैं।
विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की निर्मात्री संस्था टीएचडीसी की ओर से परियोजना निर्माण से पूर्व हाट गांव के कुछ परिवारों की भूमि अधिग्रहित कर उनका पीपलकोटी क्षेत्र में ही पुनर्वास कर दिया था। जबकि अभी भी करीब पंद्रह परिवार गांव में ही रह रहे हैं। गांव में दो प्राकृतिक पेयजल स्रोत थे, जो इस बार सूख गए हैं। ग्रामीण नरेंद्र पोखरियाल, राजेंद्र हटवाल और तारेंद्र जोशी ने आरोप लगाया कि परियोजना की तीन टनल के निर्माण के लिए किए जा रहे विस्फोटों के कारण गांव के प्राकृतिक स्रोतों का पानी भूमिगत हो गया है, जो टनल के रास्ते बाहर आ रहा है। पेयजल स्रोत सूखने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इधर, टीएचडीसी के महाप्रबंधक यूके सक्सेना का कहना है कि टनल निर्माण में विस्फोट तो किए जा रहे हैं, लेकिन इससे क्षेत्र में पेयजल स्रोतों के सूखने की कोई घटना सामने नहीं आई है। पीजी कालेज गोपेश्वर के भू वैज्ञानिक डा. अरविंद भट्ट का कहना है कि कई बार सड़क व अन्य निर्माण कार्य से भूमि के अंदर हलचल होने से भूमिगत प्राकृतिक पेयजल नालियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे पेयजल स्रोतों का रुख मुड़ जाता है।
पेयजल संकट: दिनभर में एक घंटा हो रही पानी की सप्लाई
रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि ब्लॉक के चोपड़ा क्षेत्र के 12 से अधिक गांवों में पेयजल संकट से लोग परेशान हैं। यहां जलसंस्थान की योजनाओं से नियमित सप्लाई नहीं होने के कारण ग्रामीण दूरस्थ स्रोतों की दौड़ लगा रहे हैं। कई जगह दिनभर में सिर्फ एक घंटे सप्लाई की जा रही है। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को भेजे ज्ञापन में पेयजल समस्या के त्वरित निराकरण की मांग की है।
चोपड़ा के पाली, देवलख व बाजार समेत क्षेत्र के 12 गांवों में लंबे समय से पेयजल समस्या बनी हुई है। इन क्षेत्रों में दिनभर में सिर्फ एक घंटे सप्लाई की जा रही है, जिस कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। कहना है कि पेयजल के अभाव में ग्रामीणों को स्वयं के साथ अपने मवेशियों को पानी जुटाने के लिए दूरस्थ स्रोतों की दौड़ लगानी पड़ रही है। कई बार जल संस्थान से टैंकर से पानी सप्लाई बढ़ाने को कहा गया है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहीं नहीं, पानी की आपूर्ति नहीं होने से यहां संचालित सरकारी कार्यालय, अस्पताल, बैंक में कार्यरत कर्मियों व यहां आने वाले लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान रमेश त्रिपाठी, अंकोला पुरोहित, हर्षवर्धन पुरोहित, दुर्गा देवी पुरोहित, सुनीता पुरोहित व ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को भेजे ज्ञापन में पेयजल संकट से निजात दिलाने की मांग की है। जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता संजय सिंह ने बताया कि हरसंभव प्रयास किया जा रहा है कि पेयजल संकट से जूझ रहे गांवों में पर्याप्त पानी की सप्लाई की जाए। अभी तक आठ टैंकरों से अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में सप्लाई की जा रही है।